Nuvama Asset Management के अंशु कपूर ने निवेशकों को आगाह किया है कि विदेशी निवेशकों (FII) की हालिया खरीदारी को बाजार में बड़ा बदलाव न मानें। उनका कहना है कि विदेशी पैसा अभी भी अस्थिर है और भारतीय बाजार की असली ताकत घरेलू निवेश ही है।
विदेशी निवेश पर संशय
Nuvama Asset Management के प्रेसिडेंट अंशु कपूर के मुताबिक, भारतीय इक्विटी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की खरीदारी में निरंतरता की कमी है। बार-बार होने वाली खरीद-बिक्री यह बताती है कि भारत को लेकर ग्लोबल सेंटीमेंट में अभी कोई बड़ा या स्थायी बदलाव नहीं आया है।
घरेलू निवेश का सहारा
विदेशी फंड्स की अस्थिरता के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को संभाल रखा है। अगस्त 2026 में मंथली SIP कंट्रीब्यूशन ₹32,297 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसी लिक्विडिटी के दम पर भारत ने 2025 में ग्लोबल लिस्टिंग काउंट में पहला स्थान हासिल किया है।
Nuvama Wealth का प्रदर्शन और फोकस
Nuvama अब ट्रेडिशनल इक्विटी से हटकर प्राइवेट मार्केट्स में अपने कदम जमा रही है। कंपनी कमर्शियल रियल एस्टेट फंड्स और प्राइवेट इक्विटी जैसे अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट पर जोर दे रही है। कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजों पर नजर डालें तो इसका नेट प्रॉफिट ₹1,041 करोड़ रहा है।
बाजार में सुस्ती के चलते 11 सितंबर 2026 को Nuvama Wealth के शेयर 2.28% फिसलकर ₹1,713.55 पर ट्रेड कर रहे थे। फिलहाल निवेशकों को बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसे जोखिमों पर नजर रखनी होगी।
