Nippon India Multi-Asset Omni Fund-of-Funds (FoF) ने एक साल में **9.0%** का रिटर्न देकर हाइब्रिड कैटेगरी में टॉप पर अपनी जगह बनाई है। यह फंड की रणनीति को दर्शाता है, लेकिन निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि फंड्स की रैंकिंग समय के साथ बदलती रहती है।
हाइब्रिड फंड्स में Nippon India का जलवा
Nippon India Multi-Asset Omni Fund-of-Funds (FoF) ने पिछले एक साल में 9.0% का शानदार कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया है। 2 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, इसने हाइब्रिड फंड-ऑफ-फंड्स कैटेगरी में टॉप पोजिशन हासिल की है। इस दौरान Kotak Multi Asset Omni FoF ने 8.0% और ICICI Pru Income plus Arbitrage Omni FoF ने 6.5% का रिटर्न दिया।
फंड का साइज़ और प्रदर्शन
जब हम इन रिटर्न्स का मूल्यांकन करते हैं, तो फंड के असेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) पर ध्यान देना ज़रूरी है। इस रैंकिंग में केवल उन्हीं स्कीम्स को शामिल किया गया है जिनका AUM ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा है। इस सेगमेंट में, HDFC Multi-Asset Active FoF सबसे बड़े फंड्स में से एक है, जिसका कुल फंड साइज़ ₹5,846 करोड़ है। हालांकि Nippon India का फंड एक साल, तीन महीने और तीन साल की कैटेगरी में सबसे आगे रहा, वहीं HDFC फंड ने एक महीने के रिटर्न में 2.2% के साथ टॉप स्पॉट हासिल किया।
बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन
Nippon India Multi-Asset Omni FoF का प्रदर्शन इसके बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में काफी बेहतर रहा है। एक साल की अवधि में फंड ने बेंचमार्क इंडेक्स को 9.0 प्रतिशत अंकों से पीछे छोड़ा, जबकि बेंचमार्क का रिटर्न 0.0% ही रहा। तीन साल की अवधि में यह अंतर और भी बढ़ गया, जहां फंड ने 17.9% का रिटर्न दिया, जबकि बेंचमार्क 0.0% पर ही रहा।
निवेशकों के लिए क्या है ज़रूरी?
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि म्यूचुअल फंड्स की रैंकिंग किसी खास समय-सीमा के आधार पर बदलती रहती है। एक फंड जो एक साल में अच्छा प्रदर्शन करता है, ज़रूरी नहीं कि वह एक महीने या तीन साल की अवधि में भी वैसा ही प्रदर्शन करे, जैसा HDFC फंड के छोटे समय के लीड से पता चलता है। इसलिए, निवेशकों को सिर्फ हालिया रिटर्न टेबल पर ध्यान केंद्रित करने से बचना चाहिए।
किसी भी हाइब्रिड FoF निवेशक के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है फंड की एसेट एलोकेशन स्ट्रेटेजी को समझना। ये फंड्स इक्विटी, डेट और अक्सर गोल्ड या अन्य एसेट्स में एक्सपोजर लेने के लिए दूसरे म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश करते हैं। फंड-ऑफ-फंड्स होने के नाते, निवेशकों को कुल एक्सपेंस रेशियो (Total Expense Ratio) के बारे में पता होना चाहिए, क्योंकि इसमें दोहरी फीस लग सकती है - एक FoF स्तर पर और दूसरी अंडरलाइंग स्कीम स्तर पर। निवेश करने से पहले, फंड के डिस्क्लोजर डॉक्यूमेंट्स की समीक्षा करना ज़रूरी है ताकि यह समझा जा सके कि मैनेजर पोर्टफोलियो को कितनी बार रीबैलेंस करता है और विभिन्न मार्केट साइकल्स में ऐतिहासिक रूप से उन फैसलों ने रिटर्न को कैसे प्रभावित किया है।
