Nippon India Mutual Fund के शैलेश राज भान का मानना है कि मार्केट से अब स्पेकुलेटिव प्रीमियम छंट रहे हैं। अब निवेशकों को मोमेंटम की जगह मजबूत अर्निंग्स वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।
भारतीय शेयर बाजार में आई हालिया सुस्ती ने वैल्यूएशन की चिंता को काफी हद तक कम कर दिया है। Nippon India Mutual Fund के प्रेसिडेंट और CIO (इक्विटी इन्वेस्टमेंट्स) शैलेश राज भान के मुताबिक, बाजार अब उस दौर से आगे निकल चुका है जहां स्टॉक प्राइसेज कंपनी के मुनाफे से पूरी तरह कट गए थे।
मोमेंटम से वैल्यू की ओर शिफ्ट
पिछले दो सालों में हमने कई ऐसे सेक्टर्स देखे जहां स्टॉक्स अपनी सालाना कमाई के 50 से 70 गुना तक ट्रेड कर रहे थे। ये ऊंचे मल्टीपल्स अक्सर मार्केट के शोर और मोमेंटम से प्रेरित थे, न कि ठोस फाइनेंशियल परफॉर्मेंस से। जब स्टॉक इतने ऊंचे भाव पर होते हैं, तो मामूली चूक भी भारी करेक्शन का कारण बनती है। भान का कहना है कि अब निवेशक उन कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनका ट्रैक रिकॉर्ड साफ-सुथरा है और जो कैपिटल का सही इस्तेमाल कर रही हैं।
फंडामेंटल्स पर क्यों दें ध्यान?
अब निवेश का तरीका बदल गया है। पहले का हाई-लिक्विडिटी वाला दौर अब नहीं है, जहां आंख मूंदकर कहीं भी पैसा लगाने से रिटर्न मिल जाता था। अब कामयाबी उसी को मिलेगी जो उन बिजनेस को पहचानेगा जिनकी अर्निंग पावर मजबूत है और जिनकी ग्रोथ स्ट्रैटेजी ठोस है। ऐसी कंपनियां जो कठिन ग्लोबल हालातों में भी अपने मार्जिन को बचाए रखने का दम रखती हैं, वही आगे निकलेंगी।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
भारत का लॉन्ग-टर्म आउटलुक अभी भी मजबूत है, लेकिन निवेशकों को मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर्स जैसे ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें और जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता पर नजर रखनी होगी। आने वाली तिमाहियों में अर्निंग ग्रोथ की विजिबिलिटी ही सबसे बड़ा ट्रिगर होगी। अगर कंपनियां अपने कर्ज के स्तर और एक्सपेंशन प्लान पर अनुशासन दिखाती हैं, तो बाजार के लिए आगे का रास्ता काफी स्थिर रह सकता है।
