Nifty Smallcap 250: बड़े शेयरों पर भारी पड़े स्मॉल-कैप, साल 2026 में निवेशकों की बल्ले-बल्ले

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Nifty Smallcap 250: बड़े शेयरों पर भारी पड़े स्मॉल-कैप, साल 2026 में निवेशकों की बल्ले-बल्ले

फरवरी से सितंबर 2026 के बीच Nifty Smallcap 250 TRI में **15.95%** की शानदार उछाल देखी गई, जबकि इसके उलट Nifty 50 में **8.08%** की गिरावट दर्ज की गई। यह ट्रेंड स्मॉल-कैप शेयरों के अलग रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल को दर्शाता है।

भारतीय बाजार में इस साल स्मॉल-कैप और लार्ज-कैप शेयरों के बीच प्रदर्शन का बड़ा अंतर देखने को मिला है। डेटा के मुताबिक, फरवरी से सितंबर 2026 के बीच Nifty Smallcap 250 Total Return Index (TRI) 15.95% चढ़ा है, जबकि बेंचमार्क इंडेक्स Nifty 50 में 8.08% की गिरावट रही। यह बदलाव बताता है कि कैसे छोटी कंपनियां बाजार की चाल पर लार्ज-कैप के मुकाबले अलग तरह से रिएक्ट करती हैं।

स्मॉल-कैप का इतिहास और रिस्क

स्मॉल-कैप स्टॉक्स को हमेशा हाई-ग्रोथ असेट्स माना जाता है। जून 2023 से सितंबर 2024 के बीच Nifty Smallcap 250 TRI 86.08% उछला था, जिसने Nifty 50 के 41.96% के गेन को काफी पीछे छोड़ दिया था। इसी तरह, कोविड के बाद की रिकवरी (जून 2020 से जनवरी 2021) में स्मॉल-कैप इंडेक्स 69.01% बढ़ा था, जबकि लार्ज-कैप इंडेक्स 39.68% ही बढ़ पाया था।

हालांकि, ये तेज उछाल अपने साथ जोखिम भी लाते हैं। 2020 के मार्केट क्रैश में स्मॉल-कैप इंडेक्स 29.79% तक गिर गया था, जबकि Nifty 50 में 17.51% की ही गिरावट थी। यही हाल अक्टूबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच रहा, जब स्मॉल-कैप का वैल्यूएशन 25.17% घटा और Nifty 50 में 13.90% की कमी आई।

निवेश की सीख

मार्केट लीडरशिप हमेशा एक जैसी नहीं रहती। मार्च 2025 से जनवरी 2026 के बीच Nifty 50 ने 15.67% के रिटर्न के साथ स्मॉल-कैप को पीछे छोड़ दिया था, जो कि 14.43% बढ़ पाया था।

निवेशकों के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है कि स्मॉल-कैप में बेहतर रिटर्न का मौका है, लेकिन इसके साथ अधिक वोलैटिलिटी (Volatility) भी आती है। बेहतर यही है कि आप अपने पोर्टफोलियो को अलग-अलग मार्केट कैप के बीच संतुलित रखें और अपनी रिस्क क्षमता के हिसाब से ही निवेश का फैसला लें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.