शुक्रवार को Nifty Midcap इंडेक्स में करीब **2.7%** की जोरदार गिरावट देखी गई। यह उतार-चढ़ाव मिड-कैप शेयरों की अस्थिरता को दर्शाता है। हालांकि, इतिहास बताता है कि **7 से 10** साल के लंबे निवेश में रिस्क काफी कम हो जाता है।
शुक्रवार को मिड-कैप सेगमेंट के निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका था, जब Nifty Midcap 100 और Nifty Midcap 150 इंडेक्स में करीब 2.7% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट याद दिलाती है कि मिड-कैप शेयरों में लार्ज-कैप के मुकाबले कहीं ज्यादा अस्थिरता होती है।
अस्थिरता का इतिहास (Historical Volatility)
Edelweiss Mutual Fund की एक स्टडी, जिसमें Nifty Midcap 150 Total Return Index (TRI) का विश्लेषण किया गया, बताती है कि एक साल के चक्र में रिटर्न बहुत अनिश्चित होते हैं। यह रिटर्न 67% के नुकसान से लेकर 169% के मुनाफे तक जा सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि करीब 23% मामलों में एक साल की अवधि में निवेशकों को नुकसान झेलना पड़ा है।
क्यों लंबा नजरिया जरूरी है?
जैसे ही आप निवेश का समय बढ़ाते हैं, रिस्क का ग्राफ बदलने लगता है। तीन साल की अवधि में स्थिति बेहतर होती है और 93% मामलों में पॉजिटिव रिटर्न मिलते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, 7 साल और 10 साल की अवधि में Nifty Midcap 150 ने कभी निगेटिव रिटर्न नहीं दिया है। 7 साल की खराब अवधि में भी रिटर्न 5% रहा है, जबकि 10 साल की अवधि में न्यूनतम रिटर्न 7% रहा है।
निवेशकों के लिए सलाह
ऐतिहासिक ट्रेंड भविष्य की गारंटी नहीं होते, लेकिन वे रास्ता जरूर दिखाते हैं। म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय एक्सपेंस रेशियो और फंड मैनेजर के चयन का असर भी रिटर्न पर पड़ता है। फिलहाल की गिरावट यही सिखाती है कि मिड-कैप में पैसा तभी लगाएं जब आपका लक्ष्य लंबा हो और आप शॉर्ट-टर्म शोर को नजरअंदाज करने का धैर्य रखते हों।
