Mutual Fund: नए फंड्स ने दिग्गजों को पछाड़ा, कम एसेट साइज से मिल रहा बेहतर रिटर्न

MUTUAL-FUNDS
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Mutual Fund: नए फंड्स ने दिग्गजों को पछाड़ा, कम एसेट साइज से मिल रहा बेहतर रिटर्न

2023 के बाद लॉन्च हुए नए इंडियन म्यूचुअल फंड्स ने अपने पुराने और बड़े प्रतिद्वंद्वियों को रिटर्न के मामले में पीछे छोड़ दिया है। छोटे एसेट बेस के कारण इन फंड्स को हाई-ग्रोथ स्टॉक्स में निवेश करने की ज्यादा आजादी मिल रही है।

बाजार की नई चाल

भारतीय म्यूचुअल फंड सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मार्केट की हालिया अस्थिरता के बीच, 2023 के बाद आई नई एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) जैसे Bajaj Finserv Mutual Fund, Helios Mutual Fund और Old Bridge Mutual Fund की स्कीम्स ने बड़े फंड्स के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन किया है।

छोटे पोर्टफोलियो का फायदा

इस आउटपरफॉर्मेंस की मुख्य वजह इन फंड्स का छोटा एसेट बेस है। बड़े और स्थापित फंड्स के पास भारी फंड होता है, जिससे उन्हें स्मॉल-कैप या मिड-कैप स्टॉक्स में निवेश करने पर 'इम्पैक्ट कॉस्ट' का सामना करना पड़ता है। इसका मतलब है कि बड़े ऑर्डर देने से स्टॉक की कीमत बढ़ने लगती है, जिससे एंट्री महंगी हो जाती है। इसके उलट, छोटे फंड्स इंडस्ट्रियल्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में बिना किसी रुकावट के पैसा लगा पा रहे हैं।

कुछ आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं:

  • Bajaj Finserv Small Cap स्कीम ने पिछले एक साल में 7.5% का रिटर्न दिया, जबकि इसी कैटेगरी के बड़े फंड्स औसतन 2.6% नीचे गिरे।
  • Old Bridge Focused फंड ने 5.4% का मुनाफा कमाया, जबकि बड़े प्रतिस्पर्धियों को 3.5% का नुकसान झेलना पड़ा।

निवेशकों के लिए चेतावनी

हालांकि ये आंकड़े आकर्षक दिखते हैं, लेकिन निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। इन नए फंड्स का कोई लंबा ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है। इसके अलावा, SEBI ने हाल ही में स्मॉल और मिड-कैप फंड्स के लिए कड़े 'स्ट्रेस-टेस्टिंग' नियम लागू किए हैं ताकि रिडेम्पशन के समय लिक्विडिटी का संकट न हो। सिर्फ शॉर्ट-टर्म रिटर्न देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है; असली परीक्षा तब होगी जब ये फंड्स बड़े होंगे और बाजार की अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.