Arbitrage Funds में NAV की गोतेबाजी! नए Auction Rules का असर, जानें वजह

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Arbitrage Funds में NAV की गोतेबाजी! नए Auction Rules का असर, जानें वजह

आर्बिट्राज फंड (Arbitrage Funds) के निवेशकों को पिछले कुछ दिनों से फंड के नेट एसेट वैल्यू (NAV) में कुछ अजीब उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे होंगे। यह सब 3 अगस्त, 2026 से लागू हुए नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) नियमों के बाद हो रहा है। इस बदलाव ने कैश और डेरिवेटिव मार्केट के बीच एक टाइमिंग का गैप पैदा कर दिया है, जिससे मार्क-टू-मार्केट (Mark-to-Market) में कृत्रिम उतार-चढ़ाव दिख रहे हैं।

क्या है नए नियम और क्यों आ रहा है उतार-चढ़ाव?

निवेशकों को आर्बिट्राज फंड्स के नेट एसेट वैल्यू (NAV) में हो रहे अजीब उतार-चढ़ाव से चिंता हो सकती है। यह सब 3 अगस्त, 2026 से लागू हुए F&O-एलिजिबल स्टॉक्स के लिए नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) नियमों के कारण हुआ है। इस नए सिस्टम का मकसद प्राइस डिस्कवरी को बेहतर बनाना था, लेकिन इसने आर्बिट्राज फंड्स के लिए छोटी अवधि में कुछ अप्रत्याशित दिक्कतें पैदा कर दी हैं, जो कैश और डेरिवेटिव मार्केट के बीच के प्राइस डिफरेंस पर निर्भर करते हैं।

पहले, स्टॉक्स की क्लोजिंग प्राइस की गणना 30 मिनट के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) तरीके से होती थी, जो दोपहर 3:00 बजे से 3:30 बजे के बीच होता था। नए नियमों के तहत, इसे दोपहर 3:15 बजे से 3:35 बजे के बीच होने वाली नीलामी (Auction) के जरिए निर्धारित एक सिंगल इक्विलिब्रियम प्राइस से बदल दिया गया है।

टाइमिंग गैप का खेल

इस बदलाव से एक टाइमिंग गैप बन गया है। कैश मार्केट अब नीलामी के बाद दोपहर 3:35 बजे बंद होता है, जबकि इक्विटी फ्यूचर्स मार्केट शाम 3:40 बजे तक खुला रहता है। आर्बिट्राज फंड अपने दैनिक NAV की गणना के लिए आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस का उपयोग करते हैं, इसलिए इन छोटे टाइमिंग अंतरों से फंड के दैनिक मूल्य में कृत्रिम रूप से उछाल या गिरावट आ सकती है। ये उतार-चढ़ाव अक्सर केवल अकाउंटिंग एडजस्टमेंट होते हैं, न कि फंड की अंडरलाइंग ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी की लाभप्रदता में वास्तविक बदलाव।

उदाहरण के लिए, यदि नीलामी प्रक्रिया के कारण कैश मार्केट का क्लोजिंग प्राइस अस्थायी रूप से फ्यूचर्स मार्केट प्राइस से अधिक या कम होता है, तो यह 'मार्क-टू-मार्केट' विचलन पैदा कर सकता है। फंड मैनेजरों का जोर है कि ये उतार-चढ़ाव अस्थायी हैं और जैसे-जैसे बाजार नए ट्रेडिंग टाइमलाइन के साथ तालमेल बिठाएगा, ये सामान्य हो जाने चाहिए। उच्च अस्थिरता वाले दिनों में अपने यूनिट्स को रिडीम करने वाले निवेशकों को इन कृत्रिम विकृतियों से उनके रिटर्न पर असर दिख सकता है।

लंबी अवधि पर असर?

तत्काल दैनिक अस्थिरता से परे, बाजार के जानकारों का सुझाव है कि समग्र रिटर्न पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। नई नीलामी प्रक्रिया उन ट्रेडर्स के लिए मूल्य अंतर को कैप्चर करने की विंडो को सीमित कर सकती है जो पारंपरिक रूप से निरंतर ट्रेडिंग के अंतिम मिनटों में होता था। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि इस बदलाव से सालाना रिटर्न में 50 बेसिस पॉइंट तक की मामूली कमी आ सकती है।

वर्तमान संक्रमण अवधि को देखते हुए, विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशकों को दैनिक NAV परिवर्तनों के बजाय लंबी अवधि के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। तीन से छह महीने या उससे अधिक समय तक होल्डिंग अवधि बढ़ाने से निवेशकों को इस संरचनात्मक बाजार परिवर्तन के कारण होने वाले अस्थायी शोर को नजरअंदाज करने में मदद मिल सकती है। आने वाले हफ्तों में ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी इस नई नीलामी तंत्र के अनुकूल कैसे होती हैं, यह निवेशकों के लिए मुख्य देखने लायक बात होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.