स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स अब साधारण इक्विटी इंडेक्स के बजाय हाइब्रिड और कस्टम बेंचमार्क का उपयोग कर रहे हैं। इस बदलाव के कारण निवेशकों के लिए अलग-अलग फंड्स के प्रदर्शन की तुलना करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स अब अपने परफॉर्मेंस को मापने का तरीका बदल रहे हैं। सालों से फंड मैनेजर्स अपनी सफलता का आकलन करने के लिए Nifty 500 जैसे साधारण इक्विटी इंडेक्स का इस्तेमाल करते आए हैं। लेकिन अब वे हाइब्रिड या पूरी तरह से कस्टम-मेड बेंचमार्क की ओर बढ़ रहे हैं।
बेंचमार्क के तीन बदलते स्वरूप
हालिया डेटा के अनुसार 33 इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी की समीक्षा की गई। इनमें से 19 अभी भी Nifty 500 Total Return Index या BSE 500 जैसे प्योर इक्विटी इंडेक्स पर निर्भर हैं।
वहीं, 11 स्ट्रैटेजी अब हाइब्रिड बेंचमार्क पर शिफ्ट हो चुकी हैं। इसमें Nifty 50 Hybrid Composite Debt 50:50 Index या CRISIL के हाइब्रिड वेरिएंट्स शामिल हैं, जो स्टॉक और बॉन्ड दोनों का मिश्रण ट्रैक करते हैं। यह बदलाव फंड के एसेट एलोकेशन को बेहतर तरीके से दिखाने के लिए किया गया है।
अंत में, 3 रणनीतियां पूरी तरह से कस्टम बेंचमार्क का उपयोग कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, 360 ONE Asset जैसी कंपनियां BSE Sensex TRI को शॉर्ट-टर्म बॉन्ड इंडेक्स और गोल्ड जैसी कमोडिटी वाले iCOMDEX Composite Index के साथ जोड़कर एक कॉम्प्लेक्स बेंचमार्क तैयार कर रही हैं।
निवेशकों के लिए यह क्यों मायने रखता है?
सबसे बड़ा रिस्क 'एप्पल-टू-एप्पल' तुलना का है। जब हर फंड अलग पैमाने का उपयोग करता है, तो रिटर्न के आंकड़े भ्रामक हो सकते हैं। यदि कोई फंड ऐसे बेंचमार्क का उपयोग करता है जिसे बीट करना आसान है, तो वह फंड शानदार प्रदर्शन करता हुआ दिखाई दे सकता है।
निवेशकों को सलाह है कि वे केवल हेडलाइन रिटर्न पर भरोसा न करें। अपने फंड के ऑफर डॉक्यूमेंट में दिए गए बेंचमार्क को चेक करें। यदि फंड का बेंचमार्क बहुत अधिक कस्टमाइज्ड है, तो यह जरूर समझें कि वह जोखिम को कैसे रिफ्लेक्ट कर रहा है। जितना स्पष्ट आपका बेंचमार्क होगा, फंड मैनेजर की जवाबदेही तय करना उतना ही आसान होगा।
