वेल्थ मैनेजर Neo Group ने अब म्यूचुअल फंड सेक्टर में कदम रख दिया है। कंपनी अपने **₹1.46 लाख करोड़** के मौजूदा एडवाइजरी बेस के साथ **25** शहरों में अपना नेटवर्क बिछाने की तैयारी में है।
बड़ा बदलाव और रणनीति
मुंबई स्थित वेल्थ मैनेजमेंट फर्म Neo Group अब एडवाइजरी से हटकर खुद प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरर बन गई है। 30 सितंबर, 2026 तक कंपनी ₹1.46 लाख करोड़ के एडवाइजरी और क्लाइंट एसेट्स को मैनेज कर रही थी। अब अपने खुद के म्यूचुअल फंड हाउस के जरिए कंपनी अपने क्लाइंट्स को सीधे इन-हाउस इन्वेस्टमेंट स्कीम्स ऑफर कर सकेगी।
बड़ी टीम और अनुभवी लीडरशिप
इस नए एसेट मैनेजमेंट आर्म की कमान CEO आशुतोष भार्गव के हाथों में है। भारत में मौजूद 57 एस्टेब्लिश प्लेयर्स को टक्कर देने के लिए कंपनी ने 10 फंड मैनेजर्स की एक कोर टीम तैयार की है। इन दिग्गजों का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड ₹2 लाख करोड़ से अधिक के एसेट्स मैनेज करने का रहा है, जिस पर कंपनी काफी भरोसा जता रही है। पोर्टफोलियो में लिक्विड, आर्बिट्रेज, डाइवर्सिफाइड इक्विटी और मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स शामिल होंगे।
भविष्य की योजना और चुनौतियां
ज्यादातर नई कंपनियों के उलट, Neo Group ने अभी कोई फिक्स्ड AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) टारगेट नहीं रखा है। कंपनी का पूरा ध्यान फिलहाल 25 शहरों में फिजिकल प्रेजेंस बनाने और बैंक व इंडिपेंडेंट फाइनेंशियल एडवाइजर्स का मजबूत नेटवर्क तैयार करने पर है।
हालांकि, बाजार में पहले से जमे खिलाड़ियों और लंबे ट्रैक रिकॉर्ड की कमी इस कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी अपने मौजूदा एडवाइजरी स्टैंडर्ड्स को म्यूचुअल फंड ऑपरेशंस में कैसे ढालती है और पहली स्कीम्स बाजार में कैसा प्रदर्शन करती हैं।
