Navi Flexicap Fund में जुलाई 2018 से हर महीने ₹10,000 की SIP करने वाले निवेशकों की ₹9.4 लाख की कुल जमा-पूंजी अप्रैल 2026 तक बढ़कर करीब ₹16.48 लाख हो गई है। यह फंड लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेश की रणनीति अपनाता है, लेकिन छोटे और वोलेटाइल स्टॉक्स में निवेश के अपने जोखिम भी हैं।
Navi Flexicap Fund: लंबी अवधि के निवेशकों की बल्ले-बल्ले!
Navi Flexicap Fund के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। जिन निवेशकों ने जुलाई 2018 में फंड शुरू होने के समय से हर महीने ₹10,000 की Systematic Investment Plan (SIP) शुरू की थी, उनकी कुल ₹9.4 लाख की जमा-पूंजी अप्रैल 2026 तक बढ़कर लगभग ₹16.48 लाख हो गई है। यह कमाल करीब आठ साल के अनुशासित निवेश का नतीजा है।
दमदार रिटर्न का राज?
फंड के परफॉरमेंस डेटा बताते हैं कि लंबी अवधि तक निवेशित रहने के फायदे मिलते हैं। पिछले पांच सालों में, निवेशकों ने लगातार 10% से ज्यादा का एनुअलाइज्ड रिटर्न (annualised returns) देखा है। तीन साल की अवधि में भी, ज्यादातर समय रिटर्न डबल-डिजिट के ऊपर ही रहे हैं, जो अलग-अलग मार्केट फेज में निवेशित रहने का असर दिखाता है।
फ्लेक्सी-कैप स्ट्रैटेजी का कमाल
इस फंड की सबसे खास बात है इसका फ्लेक्सी-कैप अप्रोच। यह फंड किसी खास मार्केट सेगमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि Nifty 500 जैसे ब्रॉड बेंचमार्क की तुलना में अपने वेटेज को एडजस्ट करने की पूरी आजादी रखता है। अप्रैल 2026 तक, फंड का पोर्टफोलियो काफी डायवर्सिफाइड था:
- लार्ज-कैप स्टॉक्स: 41.9%
- मिड-कैप स्टॉक्स: 11.9%
- स्मॉल-कैप स्टॉक्स: 17.8%
- माइक्रो-कैप स्टॉक्स: 20.3%
इसके अलावा, फंड ने 8.3% कैश और लिक्विड मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में भी निवेश किया है ताकि तत्काल लिक्विडिटी की जरूरतें पूरी हो सकें।
जोखिमों को न भूलें!
हालांकि, पिछला परफॉरमेंस अच्छा रहा है, लेकिन निवेशकों को इस निवेश शैली से जुड़े जोखिमों को भी समझना चाहिए। चूंकि फंड छोटे और माइक्रो-कैप कंपनियों में काफी निवेश करता है, इसलिए यह बड़े-कैप कंपनियों में निवेश करने वाले फंड्स की तुलना में ज्यादा वोलेटाइल (volatile) हो सकता है। छोटी कंपनियों में लिक्विडिटी का जोखिम ज्यादा होता है और ये इकोनॉमिक मंदी के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होती हैं, जिससे फंड के नेट एसेट वैल्यू (NAV) में बड़े उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।
फंड मैनेजमेंट टीम का कहना है कि वे स्ट्रॉन्ग कॉर्पोरेट गवर्नेंस, सस्टेनेबल ग्रोथ मॉडल और मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों पर फोकस करते हैं। वे खराब कैपिटल एलोकेशन रिकॉर्ड या कमजोर गवर्नेंस वाली कंपनियों से बचने की कोशिश करते हैं। भविष्य में, फंड का प्रदर्शन विभिन्न कैपिटलाइजेशन सेगमेंट में मार्केट लीडरशिप में बदलावों को नेविगेट करने की मैनेजर की क्षमता पर निर्भर करेगा।
