म्यूचुअल फंड्स: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! 'एग्जिट लोड' में भारी कटौती, अब पैसे निकालना हुआ आसान

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AuthorAditya Rao|Published at:
म्यूचुअल फंड्स: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! 'एग्जिट लोड' में भारी कटौती, अब पैसे निकालना हुआ आसान
Overview

भारत में 'म्यूचुअल फंड' कंपनियों ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है। एग्जिट लोड (Exit Load) की अवधि को एक साल से घटाकर **30-90 दिन** कर दिया गया है, या कुछ मामलों में तो इसे पूरी तरह खत्म ही कर दिया गया है। इस कदम से न केवल निवेशकों को बेहतर लिक्विडिटी (liquidity) मिलेगी, बल्कि यह सक्रिय फंड्स को पैसिव फंड्स (passive funds) के साथ कॉम्पिटिशन (competition) में भी मदद करेगा।

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कॉम्पिटिशन के मैदान में बड़ा बदलाव

भारतीय 'म्यूचुअल फंड' इंडस्ट्री में कॉम्पिटिशन (competition) अब सिर्फ परफॉरमेंस (performance) और फीस तक ही सीमित नहीं रहा। फंड हाउसेज (fund houses) बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी (market share) बढ़ाने और निवेशकों का ध्यान खींचने के लिए 'एग्जिट लोड' (exit load) में बड़े बदलाव कर रहे हैं।

हाल ही में, देश के दूसरे सबसे बड़े फंड हाउस, ICICI Prudential Mutual Fund ने अपनी 5 एक्टिव इक्विटी स्कीम्स (active equity schemes) के लिए 'एग्जिट लोड' की अवधि एक साल से घटाकर सिर्फ 30 दिन कर दी है। यह बदलाव 6 अप्रैल से लागू हुआ। इसके बाद WhiteOak Capital Mutual Fund ने भी तुरंत कदम उठाते हुए अपनी सभी इक्विटी और हाइब्रिड स्कीम्स (equity and hybrid schemes) से 'एग्जिट लोड' को पूरी तरह खत्म करने का ऐलान किया।

बड़ी फंड हाउसेज की रणनीति

बड़े नाम जैसे Tata Mutual Fund और SBI Mutual Fund भी इसी राह पर चलते दिख रहे हैं। Tata MF 30 दिन के अंदर रिडेम्पशन (redemption) पर 0.5% का फ्लैट 'एग्जिट लोड' लगाने की योजना बना रहा है, जबकि SBI MF 30 दिन के अंदर 0.25% और 90 दिन के अंदर 0.1% का मामूली चार्ज लेगा। यह पारंपरिक 'एग्जिट लोड' से काफी अलग है, जो अक्सर एक साल के भीतर रिडेम्पशन पर 1% तक होता था।

कॉम्पिटिशन और डिसिप्लिन का दोहरा असर

एक्सपर्ट्स (Experts) इन बदलावों के पीछे दो मुख्य वजहें बताते हैं - बढ़ता कॉम्पिटिशन (competition) और निवेशकों का बढ़ता अनुशासन। Crisil Intelligence के डायरेक्टर, Piyush Gupta का कहना है कि निवेशक अब लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, इसलिए 'एग्जिट लोड' कम अहम हो गया है। साथ ही, कड़ी प्रतिस्पर्धा और फीस को कम करने की लगातार कोशिशों से फंड हाउसेज अपने फी स्ट्रक्चर (fee structure) को सरल बना रहे हैं।

पैसिव फंड्स के साथ मुकाबला

कम 'एग्जिट लोड' सक्रिय फंड्स को पैसिव फंड्स से बेहतर तरीके से मुकाबला करने में भी मदद करेगा, जिनमें आमतौर पर कोई 'एग्जिट लोड' नहीं होता। Plan Ahead Wealth Advisors के फाउंडर और CEO, Vishal Dhawan ने कहा कि सक्रिय फंड्स को पैसिव इन्वेस्टमेंट (passive investment) के आकर्षण का मुकाबला करने के लिए बेहतर लिक्विडिटी (liquidity) देनी होगी।

एग्जिट लोड पर अलग-अलग राय

हालांकि, कुछ फंड हाउसेज अभी भी निवेश अनुशासन बनाए रखने के लिए ज़्यादा 'एग्जिट लोड' चार्ज कर रहे हैं। Parag Parikh Flexicap Fund के CEO, Neil Parikh बताते हैं कि ज्यादा 'एग्जिट लोड' एक बिहेवियरल टूल (behavioral tool) की तरह काम करता है, जो बार-बार खरीदने-बेचने से रोकता है।

वहीं, 'एग्जिट लोड' को कम या खत्म करने वाले फंड हाउसेज का मानना ​​है कि एक साल के भीतर रिडेम्पशन पर लगने वाला शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (short-term capital gains tax) पहले से ही सट्टेबाजी वाले निवेश को हतोत्साहित करता है। WhiteOak Capital MF के CEO, Aashish Somaiyaa के अनुसार, टैक्स कानून पहले से ही एक डिटेरेंट (deterrent) का काम करते हैं, ऐसे में अतिरिक्त 'एग्जिट लोड' की प्रासंगिकता कम हो जाती है और यह सिर्फ निवेश की लागत बढ़ाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.