सितंबर के महीने में म्यूचुअल फंड्स ने अपनी स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव किया है। फंड मैनेजरों ने Reliance Industries में **₹6,000 करोड़** और BSE में **₹5,500 करोड़** का निवेश बढ़ाया है, जबकि Wipro और Larsen & Toubro जैसे दिग्गज शेयरों में बिकवाली देखी गई है।
बाजार का नया मूड और रोटेशन
सितंबर के दौरान म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में एक स्पष्ट बदलाव देखने को मिला है। फंड मैनेजरों ने लार्ज-कैप स्पेस में भारी रोटेशन किया है। डेटा के मुताबिक, Reliance Industries संस्थागत निवेशकों की पहली पसंद बनी रही, जिसमें महीने भर में लगभग ₹6,000 करोड़ का निवेश आया। इसकी डायवर्सिफाइड मौजूदगी—रिटेल, एनर्जी और डिजिटल सर्विसेज—निवेशकों के लिए मुख्य आकर्षण बनी हुई है।
BSE में क्यों आई तेजी?
वहीं, एक्सचेंज ऑपरेटर BSE ने भी ₹5,500 करोड़ से अधिक का नेट इन्वेस्टमेंट हासिल किया है। इस खरीदारी की बड़ी वजह 30 सितंबर को निफ्टी 50 इंडेक्स में BSE की एंट्री है। इंडेक्स-ट्रैकिंग फंड्स को नियमों के मुताबिक शेयर खरीदने पड़ते हैं, जिससे संस्थागत हिस्सेदारी में उछाल आया है। बाजार में हुए बड़े ब्लॉक डील्स ने इन ट्रांजेक्शन्स के लिए जरूरी लिक्विडिटी उपलब्ध कराई।
फिनटेक में दिलचस्पी और दिग्गज शेयरों से दूरी
फाइनेंशियल सेक्टर अभी भी फंड्स की प्राथमिकता में बना हुआ है, जिसमें HDFC Bank और ICICI Bank जैसे प्राइवेट लेंडर्स का दबदबा कायम है। इसके अलावा, PB Fintech में भी फंड्स ने लगभग ₹1,747 करोड़ का निवेश किया है, जो यह दिखाता है कि फंड मैनेजर अब फिनटेक स्पेस में मौके तलाश रहे हैं।
इसके उलट, Wipro, Larsen & Toubro, और Tata Consultancy Services जैसे मैच्योर लार्ज-कैप शेयरों में बिकवाली देखी गई। यह रणनीति आमतौर पर पोर्टफोलियो को रिबैलेंस करने और उन सेक्टरों में कैपिटल लगाने के लिए अपनाई जाती है, जहाँ ग्रोथ की संभावनाएं बेहतर दिखाई दे रही हैं। निवेशकों को अब इन कंपनियों के आगामी फाइनेंशियल रिजल्ट्स पर नजर रखनी चाहिए, जो आगे की दिशा तय करेंगे।
