अप्रैल में म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) ने इक्विटी (equity) बाजारों में अपनी खरीदारी काफी कम कर दी, जो कि मार्च के मुकाबले ₹1 लाख करोड़ से घटकर सिर्फ ₹26,000 करोड़ रह गई। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान भारतीय शेयर बाजार में अच्छी रिकवरी देखी गई, जहाँ निफ्टी 50 (Nifty 50) 8.3% और सेंसेक्स (Sensex) करीब 7% चढ़ा।
यह एहतियाती कदम फंड मैनेजर्स द्वारा कैश रिजर्व (cash reserves) बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है, जो बढ़ती जियोपॉलिटिकल टेंशन (geopolitical tensions) और नतीजों के सीजन (earnings season) को देखते हुए उठाया गया है। मार्च में इक्विटी फंड्स के कैश रिजर्व 21 महीने के निचले स्तर 4.7% पर आ गए थे, जो दर्शाता है कि बाजार में गिरावट के दौरान पैसा लगाया गया था।
इस सावधानी के पीछे कई बाहरी कारण हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अप्रैल में भारतीय इक्विटी से करीब ₹60,847 करोड़ निकाले, जिससे साल 2026 (FY26) के लिए यह निकासी ₹1.92 लाख करोड़ तक पहुँच गई। यह घरेलू म्यूचुअल फंड्स की गतिविधि के विपरीत है, जो दिखाता है कि आम जनता का पैसा अब म्यूचुअल फंड्स की ओर जा रहा है।
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल (crude oil) की कीमतों को अप्रैल में $124 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया। इससे महंगाई बढ़ने की चिंताएं बढ़ीं और भारतीय रुपये (INR) के कमजोर होकर ₹92 प्रति US डॉलर के करीब आने का भी एक कारण बना। इन मैक्रोइकॉनॉमिक (macroeconomic) कारकों का असर कंपनियों की कमाई (corporate earnings) की उम्मीदों पर भी पड़ रहा है, जिससे निफ्टी 50 कंपनियों के लिए FY26 के मुनाफे में ग्रोथ का अनुमान पहले के 8-10% से घटकर करीब 6% कर दिया गया है।
महंगी वैल्यूएशन (valuations) भी एक चिंता का विषय है। निफ्टी 50 का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) अनुपात लगभग 21 गुना है, जो ग्लोबल अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए महंगा लगता है। भारत की ऊर्जा आयात पर भारी निर्भरता, जो 80% से अधिक है, सप्लाई में रुकावटों और कीमतों के झटकों के प्रति अर्थव्यवस्था को संवेदनशील बनाती है।
विश्लेषकों का मानना है कि आगे चलकर बाजार अधिक सतर्क और डेटा-संचालित (data-driven) रहेगा, जहाँ महंगाई, कर्ज की स्थिरता और भू-राजनीतिक स्थिरता भविष्य की चाल तय करेगी। ऐसे में, नई रणनीतिक निवेश उत्पादों जैसे नए सेक्टर रोटेशन फंड्स (Sector Rotation Funds) का उदय हो रहा है, जिनमें एक्सिस सेक्टर रोटेशन फंड (Axis Sector Rotation Fund) और क्वांट सेक्टर रोटेशन लॉन्ग-शॉर्ट फंड (Quant Sector Rotation Long-Short Fund) जैसे विकल्प शामिल हैं।
