फंड्स ने क्यों की खरीदारी जब बाजार गिर रहा था?
म्यूच्यूअल फंड मैनेजर्स ने March 2026 के दौरान लार्ज, मिड और स्मॉल कैप्स में मेजॉरिटी स्टॉक्स पर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। डेटा दिखाता है कि फंड्स ने Nifty 50 के 78%, Nifty Midcap 100 के 54%, और Nifty Smallcap 100 के 77% स्टॉक्स में अपनी हिस्सेदारी इनक्रीस की। यह खरीदारी Adani Enterprises और Bharti Airtel जैसी बड़ी कंपनियों में भी देखने को मिली।
बाजार क्यों गिरा और फंड्स पर क्या हुआ असर?
हालांकि, बाजार के हालात ने कई इन्वेस्टमेंट स्कीम्स की वैल्यू पर गहरा असर डाला। Nifty 50 इंडेक्स इस महीने 11.36% गिर गया, जो कि मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी मंथली गिरावट थी। इस गिरावट की वजह बनीं बढ़ती भू-राजनीतिक टेंशन, खासकर US-Iran के बीच बढ़ता तनाव, जिसने कच्चे तेल की कीमतों को $108-$113 प्रति बैरल तक पहुंचा दिया। इससे इन्फ्लेशन (महंगाई) की चिंताएं बढ़ गईं और रुपया भी कमजोर होकर 93.7 के करीब आ गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भी इस महीने ₹60,000 करोड़ से ज्यादा की बिकवाली की। Nifty Midcap 100 और Smallcap 100 में भी करेक्शन देखने को मिला। इन बड़ी गिरावटों का सीधा असर फंड्स की वैल्यू पर पड़ा, जहां टॉप स्कीम्स ने 6.9% से लेकर 12% तक की गिरावट दर्ज की। 30 मार्च 2026 को India VIX, जो मार्केट के डर का पैमाना है, 4 साल के हाई 27.75 पर पहुंच गया।
सेक्टर्स की परफॉरमेंस और स्टॉक्स का वैल्यूएशन
इस दौरान सेक्टर्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। एनर्जी और PSU स्टॉक्स ने कुछ स्थिरता दिखाई, जबकि Nifty IT में गिरावट आई। ऑटो और रिएल्टी सेक्टर्स करीब 15% तक गिरे। जिन स्टॉक्स में फंड्स ने भारी खरीदारी की, उनकी वैल्यूएशन (Valuations) भी अलग-अलग थी। उदाहरण के लिए, Bharti Airtel का P/E रेशियो करीब 32.4-37 था, जो इंडस्ट्री एवरेज के आसपास है। Adani Enterprises का P/E लगभग 16.54-25.3 था, जो इसके 10 साल के मीडियन से काफी नीचे है। Shriram Finance का P/E लगभग 18.35-25.88 था, जो इसके ऐतिहासिक मीडियन से ऊपर था।
रिटेल निवेशकों का भरोसा और मुख्य जोखिम
बाजार में गिरावट के बावजूद, एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी फंड्स में इनफ्लो (inflow) जारी रहा। March 2026 में कुल ₹40,450.26 करोड़ का इनफ्लो हुआ, और एसआईपी (SIP) कंट्रीब्यूशन रिकॉर्ड ₹32,087 करोड़ तक पहुंच गया। यह रिटेल निवेशकों का प्रोफेशनल मैनेजमेंट पर भरोसा दिखाता है। March 2026 का मार्केट काफी जोखिम भरा रहा, जिसने कई स्कीम्स के फंड वैल्यूज को नीचे खींचा। मध्य-पूर्व में लगातार भू-राजनीतिक संघर्ष ने सेंटीमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे India VIX 4 साल के हाई पर पहुंचा। इसे FIIs की भारी बिकवाली (मार्च में ₹60,000 करोड़ से ज्यादा) ने और खराब कर दिया। डेब्ट फंड्स से ₹2.94 लाख करोड़ का बड़ा आउटफ्लो भी देखा गया, जिससे ओवरऑल मार्केट लिक्विडिटी प्रभावित हो सकती थी। HDFC Large Cap Fund जैसे फंड्स में 12% तक की भारी गिरावट ने पोर्टफोलियो की कमजोरियों को उजागर किया।
एनालिस्ट्स की राय और आगे का अनुमान
हालांकि, मार्च की उथल-पुथल के बाद सेंटीमेंट में रिकवरी के संकेत दिखने लगे। ICICI Direct के एनालिस्ट्स ने अप्रैल में तेज उछाल की उम्मीद जताई, कि शायद सबसे बुरा दौर बीत चुका है। Nifty Smallcap 100 इंडेक्स के लिए 2026 के अंत तक 20-25% की बढ़त का अनुमान लगाया गया था, जो मार्च की गिरावट के बाद आया। Axis Securities की पिछली भविष्यवाणियों में Nifty 50 का टारगेट 26,800 रखा गया था, जो अप्रत्याशित भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण हुए असल बाजार के नतीजों से बिल्कुल अलग था।