Mutual Fund Ratings: अक्टूबर 2026 की नई रेटिंग जारी, उतार-चढ़ाव भरे बाजार में कैसे चुनें सही फंड?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Mutual Fund Ratings: अक्टूबर 2026 की नई रेटिंग जारी, उतार-चढ़ाव भरे बाजार में कैसे चुनें सही फंड?

अक्टूबर 2026 के लिए म्यूचुअल फंड की नई परफॉरमेंस रेटिंग जारी कर दी गई हैं। बाजार में जारी अनिश्चितता और Nifty 50 में करेक्शन के बीच, ये रेटिंग निवेशकों को रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न समझने में मदद करेंगी।

अक्टूबर 2026 में जारी की गई ये नई रेटिंग्स निवेशकों के लिए एक स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क की तरह काम करेंगी। पिछले एक साल में भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण Nifty 50 में करीब 7.6% की गिरावट देखी गई है। ऐसे कठिन दौर में केवल रिटर्न देखकर फैसला लेना काफी नहीं है, इसलिए 5-स्टार रेटिंग सिस्टम अब रिस्क मैनेजमेंट को परखने का सबसे जरूरी पैमाना बन गया है।

रिटर्न के बजाय रिस्क पर फोकस

नई रेटिंग्स में इक्विटी, पैसिव, डेट और कैश फंड्स का आकलन 'रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न' के आधार पर किया गया है। इक्विटी फंड्स के लिए Sortino रेशियो को शामिल किया गया है, जो यह बताता है कि फंड गिरावट के दौरान अपने रिस्क को कैसे मैनेज करता है। वहीं, पैसिव फंड्स के लिए ट्रैकिंग एरर (Tracking Error) को मुख्य आधार बनाया गया है, ताकि यह पता चल सके कि फंड अपने इंडेक्स को कितनी सटीकता से कॉपी कर रहा है।

डेट और कैश फंड्स की बारीकियां

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीतियों के कारण ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में डेट फंड्स में 'क्रेडिट क्वालिटी' की जांच बेहद अहम हो गई है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे AA-रेटेड एक्सपोजर पर नजर रखें, क्योंकि एसेट क्वालिटी में जरा सी भी गिरावट निवेश की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।

मार्केट में अनुशासन क्यों जरूरी?

बाजार में गिरावट के बावजूद रिटेल निवेशकों का भरोसा कायम है, जिसका प्रमाण यह है कि 2026 में SIP निवेश ₹32,000 करोड़ के पार पहुंच गया है। एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि घबराहट में आकर अपना निवेश न निकालें। इसके बजाय, रेगुलर प्लान की तुलना में डायरेक्ट प्लान (Direct Plan) को प्राथमिकता दें। कम एक्सपेंस रेशियो वाला यह विकल्प लॉन्ग टर्म में बड़ी वेल्थ बनाने में मददगार साबित होता है। निवेश का फैसला इंडेक्स के शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव के आधार पर नहीं, बल्कि अपने लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल लक्ष्यों के हिसाब से लें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.