Mutual Fund NFOs: रोज़ आ रहे नए फंड, पर निवेशकों की जेब खाली!

MUTUAL-FUNDS
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Mutual Fund NFOs: रोज़ आ रहे नए फंड, पर निवेशकों की जेब खाली!

Mid-2026 के जुलाई और अगस्त महीनों में एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMCs) लगभग रोज़ एक नया म्यूचुअल फंड (MF) लॉन्च कर रही हैं, खासकर पैसिव इक्विटी स्पेस में। लेकिन निवेशकों की दिलचस्पी अभी भी कम है, और जून 2026 तिमाही में नए फंड ऑफर (NFO) से कुल कलेक्शन पिछले 5 सालों में सबसे कम रहा।

रोज़ एक नया फंड, पर क्यों?

भारतीय म्यूचुअल फंड कंपनियों ने नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की रफ़्तार तेज कर दी है। जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान, वे हर रोज़ लगभग एक नया फंड ऑफर (NFO) ला रहे हैं। यह फंड हाउस की अपनी प्रोडक्ट रेंज को पूरा करने की स्ट्रेटेजी है, न कि किसी बड़ी निवेशक मांग का नतीजा।

पैसिव फंड्स का दबदबा

ये लॉन्च मुख्य रूप से पैसिव इन्वेस्टमेंट, जैसे इंडेक्स फंड और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) में हो रहे हैं। इसकी एक वजह SEBI के नियम भी हैं। फरवरी 2026 से लागू हुए नियमों के अनुसार, AMCs अब ज़्यादा सेक्टोरल या थीमैटिक फंड लॉन्च नहीं कर सकतीं। साथ ही, नए इक्विटी फंड्स को मौजूदा प्रोडक्ट्स से ज़्यादा अलग होना पड़ेगा। ऐसे में, फंड हाउस पैसिव फंड्स को अपनाकर अपनी रेंज बढ़ा रहे हैं।

कलेक्शन में भारी गिरावट

लॉन्च की संख्या ज़्यादा होने के बावजूद, इन NFOs से मिलने वाला पैसा उम्मीद से काफी कम है। जून 2026 तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि NFO कलेक्शन में पिछले साल की तुलना में 73% की गिरावट आई है, जो घटकर ₹1,759 करोड़ रह गया है। यह पिछले 5 सालों का सबसे निचला स्तर है। इससे पता चलता है कि नए फंड की सप्लाई और निवेशकों की मांग में भारी अंतर है। फंड हाउस भले ही अपनी प्रोडक्ट लिस्ट पूरी करना चाहते हों, लेकिन रिटेल निवेशक पुराने, भरोसेमंद फंड्स पर ज़्यादा भरोसा कर रहे हैं।

निवेशक क्यों हैं समझदार?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशक अब थकान (fatigue) महसूस कर रहे हैं। बाज़ार में पहले से ही हजारों फंड्स मौजूद हैं, ऐसे में निवेशक नए, बिना ट्रैक रिकॉर्ड वाले फंड में पैसा लगाने से कतरा रहे हैं। मार्केट की अनिश्चितता (volatility) ने भी निवेशकों को और सतर्क बना दिया है। वे नए NFOs के पीछे भागने के बजाय, अपने मौजूदा सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) जारी रख रहे हैं, जो फंड सब्सक्रिप्शन में नरमी के बावजूद मजबूत बने हुए हैं।

निवेशकों के लिए यह ज़रूरी है कि वे किसी भी नए फंड पर विचार करते समय उसकी स्ट्रैटेजी, क्या वह सस्ते इंडेक्स फंड्स से बेहतर है, और उसके एक्सपेंस रेश्यो को ध्यान से देखें। ऐसे में, यह तय करना निवेशक की ज़रूरत पर निर्भर करेगा कि नया फंड उनके पोर्टफोलियो में कोई खास कमी पूरी करता है या कोई पुराना फंड ही उनका काम ज़्यादा भरोसेमंद तरीके से कर सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.