म्यूचुअल फंड की दुनिया में नए फंड लॉन्च (NFO) की रफ्तार 10 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। जून 2026 में कुल ₹460 करोड़ का ही कलेक्शन हुआ। खास बात यह है कि पिछले 5 सालों में पहली बार, फाइनेंशियल ईयर 27 की पहली तिमाही में किसी भी नए सेक्टरल या थीमैटिक एक्टिव फंड को लॉन्च नहीं किया गया। यह बाज़ार की अनिश्चितता के बीच फंड हाउसेस की सतर्क रणनीति का संकेत है।
क्यों थमी NFO की रफ्तार?
भारतीय म्यूचुअल फंड हाउसेस ने अपनी प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव किया है। नतीजतन, नए सेक्टरल और थीमैटिक एक्टिव फंड्स की लॉन्चिंग पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में, इन खास कैटेगरी में एक भी नया फंड लॉन्च नहीं हुआ, ऐसा पिछले लगभग 5 सालों में पहली बार देखने को मिला है। यह हाल के दिनों के बिल्कुल उलट है, जब फंड हाउसेस निवेशकों की रुचि भुनाने के लिए अक्सर खास थीम वाले प्रोडक्ट्स लाते रहते थे।
नए फंड ऑफर्स (NFOs) में यह धीमी रफ्तार सिर्फ सेक्टरल कैटेगरी तक ही सीमित नहीं है। सभी नए फंड लॉन्च से जुटाई गई कुल राशि जून 2026 में घटकर ₹460 करोड़ रह गई, जो पिछले 10 महीनों का सबसे निचला स्तर है। लगातार चौथे महीने नए स्कीम्स में इनफ्लो (Inflows) में गिरावट दर्ज की गई है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि प्रोडक्ट सैचुरेशन (Product Saturation) और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) द्वारा मौजूदा बाजार हालात को देखते हुए अपनाई जा रही अधिक सतर्क रणनीति इस गिरावट की वजह है।
रेगुलेटरी और मार्केट दबाव का असर
हाल ही में सेबी (SEBI) द्वारा पोर्टफोलियो ओवरलैप (Portfolio Overlap) को लेकर किए गए रेगुलेटरी बदलावों ने फंड हाउसेस के प्रोडक्ट डिजाइन को प्रभावित किया है। रेगुलेटर्स ने स्कीम्स के एक-दूसरे से मिलते-जुलते होने की हद को सीमित करके, फंड मैनेजर्स को समान फंड लॉन्च करने के बजाय यूनिक वैल्यू प्रपोजिशन (Unique Value Propositions) पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इस रेगुलेटरी माहौल के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष जैसी वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने एक्टिव थीमैटिक मैनेजमेंट से जुड़े ज्यादा फीस को सही ठहराना मुश्किल बना दिया है।
इसके परिणामस्वरूप, फंड हाउसेस अब पैसिव (Passive) सेक्टरल और थीमैटिक प्रोडक्ट्स लॉन्च करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। पैसिव फंड्स, जो आमतौर पर किसी इंडेक्स को ट्रैक करते हैं, अपनी कम एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratios) और ज्यादा पारदर्शिता के कारण लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि इंडस्ट्री अब सरल, कम लागत वाले निवेश वाहनों की ओर बढ़ रही है, जबकि अतीत में एक्टिव मैनेजर्स छोटी अवधि के मार्केट मोमेंटम (Market Momentum) का फायदा उठाने के लिए थीमैटिक फंड लॉन्च कर सकते थे।
निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए?
निवेशकों के लिए, मुख्य बात यह होगी कि आने वाले समय में प्रोडक्ट लॉन्च का रुझान 'निच थीम्स' (Niche Themes) की बजाय अधिक स्थिर या डाइवर्सिफाइड (Diversified) कैटेगरी की ओर बढ़ेगा। जैसे-जैसे फंड हाउसेस ऐसे लॉन्च को प्राथमिकता देंगे जो वास्तविक डाइवर्सिफिकेशन या यूनिक इन्वेस्टमेंट मैंडेट्स (Unique Investment Mandates) प्रदान करते हैं, आने वाले महीनों में NFO एक्टिविटी की गति बाजार के वैल्यूएशन्स (Valuations) में इंडस्ट्री के आत्मविश्वास को दर्शाएगी। निवेशक यह भी देख सकते हैं कि क्या अनिश्चित बाजार माहौल में लागत और रेगुलेटरी अनुपालन को प्रबंधित करने के तरीके के रूप में पैसिव सेक्टरल प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति जारी रहती है।
