साल 2026 के पहले 6 महीनों में म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की न्यू फंड ऑफर (NFO) कलेक्शन में भारी गिरावट आई है। यह कलेक्शन पिछले साल की तुलना में **35%** घटकर **₹12,420 करोड़** रह गया है। निवेशक अब नए फंड्स के मामले में ज्यादा समझदारी दिखा रहे हैं।
Detailed Coverage
क्यों घटी NFO की डिमांड?
एम्फी (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में कुल कलेक्शन ₹12,420 करोड़ रहा, जो 2025 की इसी अवधि में ₹19,092 करोड़ था। यह 35% की बड़ी गिरावट है, जबकि फंड हाउस नए लॉन्च लगातार कर रहे हैं। इस छमाही में 120 नए फंड लॉन्च हुए, जो पिछले साल के 127 से थोड़ा ही कम है।
खास बात यह है कि यह गिरावट साल दर साल तेज हुई। पहली तिमाही में कलेक्शन ठीक-ठाक रहा, लेकिन दूसरी तिमाही में यह सिर्फ ₹1,759 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब है कि जब मार्केट में अनिश्चितता (Volatility) बढ़ी, तो निवेशकों ने नए फंड्स में पैसा लगाने से परहेज करना शुरू कर दिया। आपको बता दें कि 2026 के मध्य तक निफ्टी 50 (Nifty 50) में 8% से ज्यादा की गिरावट देखी गई थी।
टॉप फंड्स पर निवेशकों का भरोसा
ऐसा लग रहा है कि निवेशक अब फंड के साइज, पुराने परफॉर्मेंस (Track Record) और ब्रांड पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ACE MF के डेटा के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में लॉन्च हुए नए फंड्स का कुल एसेट ₹26,356 करोड़ रहा, जबकि 2025 की पहली छमाही में यह ₹49,335 करोड़ था।
पूरे कलेक्शन का लगभग 47.4% यानी करीब ₹12,481 करोड़ सिर्फ टॉप 10 NFOs में ही आया है। इससे साफ है कि निवेशक अब चुनिंदा फंड्स में ही पैसा लगा रहे हैं। SBI Mutual Fund, ICICI Prudential Mutual Fund, HDFC Mutual Fund, DSP Mutual Fund, Kotak Mahindra Mutual Fund और Parag Parikh Mutual Fund जैसे बड़े फंड हाउस को इसका फायदा मिला है। SBI Quality Fund ने करीब ₹2,400 करोड़ और iSIF Equity Ex-Top 100 Long-Short Fund ने ₹1,913 करोड़ जुटाए हैं।
निवेशकों का बदलता रवैया
निवेशक अब सिर्फ एक तरह की स्कीम में पैसा लगाने के बजाय अलग-अलग कैटेगरी में अपना पैसा फैला रहे हैं। क्वालिटी इक्विटी फंड्स, स्मॉल-कैप स्कीम्स, लॉन्ग-शॉर्ट स्ट्रेटेजी, डेट इंडेक्स फंड्स और मल्टी-एसेट प्रोडक्ट्स में अच्छा कलेक्शन देखने को मिला है। यह दिखाता है कि निवेशक इन नए फंड्स का इस्तेमाल अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई (Diversify) करने के लिए कर रहे हैं, न कि किसी एक एसेट क्लास के पीछे भागने के लिए।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि NFO के समय ₹10 का नेट एसेट वैल्यू (NAV) कोई खास फायदा नहीं देता। फंड का असली परफॉर्मेंस उसके इन्वेस्टमेंट ऑब्जेक्टिव और एसेट एलोकेशन पर ही निर्भर करेगा। मार्केट की मौजूदा उठापटक के बीच, निवेशक यह देख रहे हैं कि क्या नया फंड उनके पोर्टफोलियो में कुछ खास जोड़ रहा है या सिर्फ मौजूदा फंड्स जैसा ही है।
