ज्यादातर निवेशक समझते हैं कि जिस समय वे 'Pay' बटन दबाते हैं, वही NAV तय हो जाता है। लेकिन असल में म्यूचुअल फंड में निवेश का NAV इस पर निर्भर करता है कि पैसा फंड हाउस के खाते में कब पहुँचता है।
बहुत से निवेशक यह मानकर चलते हैं कि निवेश के प्लेटफॉर्म पर जिस पल उन्होंने ट्रांजैक्शन शुरू किया, उन्हें उसी समय का NAV मिल जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि यह पूरी प्रक्रिया इस बात पर टिकी है कि एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के खाते में पैसा कब 'रियलाइज' हुआ है। मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौरान यह अंतर बड़े वैल्युएशन के झटके दे सकता है।
कट-ऑफ का स्टैंडर्ड नियम
ज्यादातर इक्विटी, हाइब्रिड और डेट फंड के लिए सेम-डे NAV का कट-ऑफ टाइम 3:00 PM तय है। अगर पैसा इस डेडलाइन से पहले फंड हाउस के खाते में पहुँचता है, तभी आपको उस दिन का NAV मिलता है। अगर भुगतान 3:00 PM के बाद होता है, तो ट्रांजैक्शन अगले बिजनेस डे पर चला जाता है, जिससे NAV बदल सकता है।
वहीं, लिक्विड और ओवरनाइट फंड्स के लिए नियम और भी सख्त हैं। यहाँ कट-ऑफ टाइम अक्सर 1:30 PM होता है, इसलिए इन फंड्स में निवेश करते समय समय का खास ध्यान रखना जरूरी है।
पैसा पहुँचने (Realization) का मतलब
'रियलाइजेशन' का मतलब है आपके बैंक खाते से पैसा कटकर सीधे म्यूचुअल फंड स्कीम के बैंक खाते में पहुँचना। भले ही UPI या नेट बैंकिंग आज बहुत तेज हैं, लेकिन इंटर-बैंक सेटलमेंट में कभी-कभी देरी हो सकती है। अगर बैंक सर्वर में कोई दिक्कत है या ट्रांजैक्शन का ट्रैफिक ज्यादा है, तो पैसा कट-ऑफ टाइम तक नहीं पहुँच पाएगा।
SEBI (Mutual Funds) रेगुलेशंस, 2026, जो अप्रैल 2026 से लागू हुए हैं, उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने पर जोर दिया है ताकि सभी निवेशकों के साथ समान व्यवहार हो।
ध्यान रखने वाली बातें
देर शाम, वीकेंड या छुट्टियों के दिन किए गए ट्रांजैक्शन स्वाभाविक रूप से अगले कामकाजी दिन ही प्रोसेस होते हैं। निवेश में किसी भी तरह की देरी से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि कट-ऑफ टाइम को आखिरी समय न मानें। ट्रांजैक्शन हमेशा दिन में जल्दी निपटा लें ताकि तकनीकी कारणों से आपका पैसा गलत NAV पर निवेश न हो जाए।
