Financial Year 2026 में म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ग्रामीण भारत (Tier III) में नए निवेशकों का आंकड़ा **6.1 मिलियन** से घटकर **1.3 मिलियन** पर आ गया है, जबकि Tier II शहरों ने **3.9 मिलियन** नए निवेशकों को जोड़कर बाजी मार ली है।
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की ग्रोथ स्टोरी में इस फाइनेंशियल ईयर एक बड़ा डायवर्जेंस देखने को मिला है। सेबी (SEBI) के आंकड़ों के मुताबिक, जहां पिछले साल ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों (Tier III) में निवेश का जबरदस्त उत्साह था, वहीं इस साल यह रफ्तार काफी धीमी हो गई है। मार्च 2026 के अंत तक इन इलाकों में कुल यूनिक निवेशकों की संख्या 33.9 मिलियन रही, जो कि मात्र 3.8% की सालाना बढ़ोतरी है।
Tier II बना नया ग्रोथ इंजन
ग्रामीण इलाकों में आई इस सुस्ती के उलट, Tier II शहरों ने म्यूचुअल फंड के लिए नए ग्रोथ इंजन का काम किया है। इन 104 बड़े शहरों में 3.9 मिलियन नए निवेशक जुड़े हैं, जो पिछले साल के 1.8 मिलियन के आंकड़े से दोगुने से भी ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन शहरों में बेहतर रोजगार के मौके और स्टेबल सैलरी स्ट्रक्चर के चलते लोग बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान भी अपने SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) को जारी रखने का साहस दिखा पा रहे हैं।
क्यों घबरा रहे हैं ग्रामीण निवेशक?
बाजार में आई गिरावट ने ग्रामीण निवेशकों की मजबूती को टेस्ट किया है। असल में, कई नए निवेशक बाजार की तेजी को देखकर इसमें आए थे, लेकिन प्रोफेशनल एडवाइजरी की कमी के कारण जैसे ही बाजार में करेक्शन (Correction) आया, बहुत से लोगों ने घबराकर बाहर निकलने (Premature Exit) का रास्ता चुन लिया। यह साफ है कि सिर्फ संख्या बढ़ाने से काम नहीं चलेगा, अब जरूरत 'इन्वेस्टर एजुकेशन' और लंबी अवधि की समझ विकसित करने की है ताकि छोटे शहरों के निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव में भी टिके रहें।
