Mutual Fund Data: इंडस्ट्री AUM ₹85.76 लाख करोड़ के पार, निवेशकों का मिड-कैप और डेट फंड्स की ओर झुकाव

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AuthorMehul Desai|Published at:
Mutual Fund Data: इंडस्ट्री AUM ₹85.76 लाख करोड़ के पार, निवेशकों का मिड-कैप और डेट फंड्स की ओर झुकाव

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए अगस्त 2026 के परफॉरमेंस आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। इस दौरान इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) **₹85.76 लाख करोड़** के पार पहुंच गया है। जुलाई में इक्विटी फंड्स में इनफ्लो **15%** घटा है, वहीं निवेशकों का मिड-कैप और डेट-ओरिएंटेड स्कीम्स की ओर रुझान बढ़ा है।

म्यूचुअल फंड्स का नया रिपोर्ट कार्ड!

15 अगस्त 2026 को भारतीय म्यूचुअल फंड्स की लेटेस्ट परफॉरमेंस रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में इक्विटी, डेट और हाइब्रिड कैटेगरी के फंड्स के नेट एसेट वैल्यू (NAV), एक्सपेंस रेशियो और लॉन्ग-टर्म कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) जैसे अहम आंकड़े दिए गए हैं। ये सभी आंकड़े निवेशकों को फंड्स के पिछले प्रदर्शन का अंदाजा देते हैं, हालांकि इन्हें मौजूदा बाजार के माहौल में समझना बेहद जरूरी है।

AUM का बड़ा आंकड़ा और निवेशकों का बदलता मिजाज

जुलाई 2026 तक, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल AUM ₹85.76 लाख करोड़ रहा। बाजार के रुझान बताते हैं कि निवेशक अब अलग-अलग स्कीम्स में सोच-समझकर पैसा लगा रहे हैं। जहां इक्विटी फंड्स में जुलाई में 15% की गिरावट देखी गई, वहीं डेट-ओरिएंटेड स्कीम्स में ₹1.88 लाख करोड़ का जोरदार इनफ्लो आया। इससे यह साफ है कि निवेशक मौजूदा बाजार की अनिश्चितताओं को देखते हुए अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।

मिड-कैप और स्मॉल-कैप की धूम

परफॉरमेंस डेटा से यह भी पता चलता है कि निवेशक लार्ज-कैप फंड्स से निकलकर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। हाल के दिनों में लार्ज-कैप फंड्स से पैसा निकाला भी गया है। इस तरह के 'स्टाइल रोटेशन' यानी बाजार के विभिन्न हिस्सों में निवेशक की रुचि का बदलना, फंड की रैंकिंग में तेजी से बदलाव ला सकता है। इसलिए, आज का प्रदर्शन कल के नतीजों से अलग हो सकता है।

इकोनॉमी का सीधा असर

बाजार की चाल पर ग्लोबल ऑयल प्राइस की वोलेटिलिटी और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सतर्क रुख जैसे मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर का असर साफ दिख रहा है। खासकर डेट मार्केट इससे प्रभावित है। 10-वर्षीय गवर्नमेंट सिक्योरिटी (G-Sec) यील्ड अगस्त में 6.85% तक पहुंच गई थी, जिसका सीधा असर फिक्स्ड-इनकम फंड्स की परफॉरमेंस पर पड़ता है।

निवेश का सही तरीका

यह ध्यान रखना अहम है कि पिछला प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं होता। केवल टॉप-क्वार्टाइल रैंकिंग पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि फंड्स के लिए लगातार टॉप पर बने रहना मुश्किल होता है। ऐसे में, केवल एब्सोल्यूट रिटर्न पर ध्यान देने के बजाय, सॉर्टिनो रेशियो जैसे रिस्क-एडजस्टेड मेट्रिक्स को देखना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। यह आपको यह समझने में मदद करेगा कि फंड अपने साथियों की तुलना में जोखिम को कैसे मैनेज कर रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.