मल्टीकैप फंड्स की तूफानी चाल! फ्लेक्सीकैप को पछाड़ा, जानें क्यों पोर्टफोलियो स्ट्रक्चर है अहम

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AuthorAditya Rao|Published at:
मल्टीकैप फंड्स की तूफानी चाल! फ्लेक्सीकैप को पछाड़ा, जानें क्यों पोर्टफोलियो स्ट्रक्चर है अहम

पिछले तीन और पांच सालों में मल्टीकैप म्यूचुअल फंड्स ने फ्लेक्सीकैप फंड्स को पीछे छोड़ते हुए शानदार रिटर्न दिया है। इस प्रदर्शन के पीछे की मुख्य वजह इन फंड्स का अनिवार्य निवेश ढांचा है, जो लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स का संतुलित मिश्रण बनाए रखने पर जोर देता है।

मल्टीकैप फंड्स का शानदार प्रदर्शन

हालिया आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन और पांच सालों के दौरान मल्टीकैप म्यूचुअल फंड्स ने फ्लेक्सीकैप फंड्स को अपने प्रदर्शन से मात दी है। जहाँ फ्लेक्सीकैप फंड्स को बाजार की चाल के हिसाब से अलग-अलग मार्केट कैप वाली कंपनियों में पैसा लगाने की सहूलियत मिलती है, वहीं मल्टीकैप फंड्स ने हाल के समय में लगातार बेहतर प्रदर्शन दिखाया है।

पोर्टफोलियो स्ट्रक्चर का कमाल

इस अंतर का मुख्य कारण मल्टीकैप फंड्स का अनिवार्य पोर्टफोलियो स्ट्रक्चर माना जा रहा है। इंडस्ट्री के डेटा के अनुसार, मल्टीकैप स्कीम्स को अपने कुल फंड का कम से कम 25% लार्ज-कैप, 25% मिड-कैप और 25% स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेश करना ही पड़ता है। इस व्यवस्था के चलते, ये फंड्स मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखते हैं, भले ही उस समय लार्ज-कैप स्टॉक्स में ज्यादा स्थिरता दिख रही हो।

इसके विपरीत, फ्लेक्सीकैप फंड्स किसी भी मार्केट कैप में निवेश करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। लेकिन, पिछले पांच सालों के आंकड़ों को देखें तो इन्होंने लगातार अपने पोर्टफोलियो का 60% से अधिक हिस्सा लार्ज-कैप स्टॉक्स में ही रखा है। इस रणनीति के कारण इनका प्रदर्शन निफ्टी 500 जैसे लार्ज-कैप इंडेक्स के करीब रहता है, न कि पूरे मार्केट की चाल का।

बाजार में तेजी का असर

जब मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में जोरदार तेजी आती है, तब मल्टीकैप फंड्स और फ्लेक्सीकैप फंड्स के प्रदर्शन का अंतर और भी साफ नजर आता है। चूंकि मल्टीकैप फंड्स को इन सेगमेंट्स में बड़ा निवेश रखना जरूरी होता है, वे बाजार की व्यापक तेजी का फायदा उठाने में सफल रहते हैं। वहीं, फ्लेक्सीकैप फंड्स, जो बड़े स्टॉक्स पर ज्यादा फोकस करते हैं, अक्सर मिड और स्मॉल-कैप स्पेस में होने वाली तेज बढ़त से चूक जाते हैं।

जोखिम और भविष्य का नजरिया

हालांकि, यह ढांचा पिछले कुछ सालों में फायदेमंद साबित हुआ है, लेकिन इसमें कुछ जोखिम भी शामिल हैं। मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में ज्यादा आवंटन वाले पोर्टफोलियो में आम तौर पर लार्ज-कैप-भारी पोर्टफोलियो की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। अगर बाजार का माहौल बदलता है और लार्ज-कैप स्टॉक्स छोटे स्टॉक्स से बेहतर प्रदर्शन करते हैं, तो मल्टीकैप फंड्स में मिड और स्मॉल-कैप का अनिवार्य आवंटन उनके कुल प्रदर्शन को धीमा कर सकता है।

इन फंड्स का मूल्यांकन करते समय, सिर्फ पिछले रिटर्न पर ही ध्यान देना काफी नहीं है। निवेशकों को अपनी जोखिम सहनशीलता और निवेश लक्ष्यों पर भी विचार करना चाहिए। मल्टीकैप फंड्स तीनों मार्केट सेगमेंट्स में लगातार एक्सपोजर प्रदान करते हैं, जो व्यापक बाजार में भागीदारी चाहने वाले निवेशकों के लिए अच्छा है। दूसरी ओर, फ्लेक्सीकैप फंड्स फंड मैनेजर को आवंटन तय करने की छूट देते हैं, जिससे बाजार में गिरावट के दौरान बड़े और सुरक्षित स्टॉक्स में पैसा लगाकर स्थिरता लाने की क्षमता मिलती है।

निवेशकों के लिए भविष्य में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये फंड्स विभिन्न मार्केट साइकल्स में कैसा प्रदर्शन करते हैं। क्या मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट्स लार्ज-कैप स्पेस की तुलना में तेज गति से बढ़ते रहेंगे, या बाजार की लीडरशिप में बदलाव से वर्तमान प्रदर्शन का फायदा बदल जाएगा, यह भविष्य के रिटर्न को तय करेगा।

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