अगस्त 2026 में मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स ने शानदार प्रदर्शन किया है। प्रीcious मेटल्स (सोना-चांदी) में आई तेजी का फायदा इन फंड्स को मिला है, हालांकि जुलाई में इनमें निवेश का प्रवाह घटकर **₹3,753.38 करोड़** रह गया है।
मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स इस समय हाइब्रिड कैटेगरी में सबसे आगे चल रहे हैं। इसका मुख्य कारण पोर्टफोलियो में सोना और चांदी का तगड़ा एक्सपोजर है। उदाहरण के तौर पर, 360 ONE Multi Asset Allocation Fund ने पिछले एक साल में करीब 27.1% का रिटर्न दिया है। इक्विटी, डेट और कमोडिटी में फ्लेक्सिबल निवेश के चलते ये फंड्स उस मार्केट उतार-चढ़ाव को भी मात देने में सफल रहे हैं, जहां Nifty 50 का प्रदर्शन सुस्त रहा है।
कमोडिटी से मिला सुरक्षा कवच
SEBI के नियमों के मुताबिक, इन फंड्स को कम से कम तीन एसेट क्लासेज में निवेश करना होता है। अगस्त 2026 में चांदी में करीब 19% और सोने में 15% की तेजी ने निवेशकों की झोली भरी है। जब शेयर बाजार में अनिश्चितता थी, तब इन धातुओं ने पोर्टफोलियो को मजबूती प्रदान की।
निवेशकों की दिलचस्पी में कमी
शानदार प्रदर्शन के बावजूद, जुलाई 2026 में इनमें कुल इनफ्लो ₹3,753.38 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले कम है। जानकारों का कहना है कि अब निवेशक अधिक सावधानी बरत रहे हैं और बाजार का शुरुआती जोश ठंडा पड़ता दिख रहा है।
बेंचमार्क में बदलाव की तैयारी
अब फंड हाउस, जैसे Kotak Mahindra Asset Management Co., अपने परफॉर्मेंस की तुलना सिर्फ Nifty 50 से करने के बजाय 'ब्लेंडेड बेंचमार्क' (Nifty 500 + गोल्ड + डेट) का उपयोग कर रहे हैं, ताकि सही रिस्क-रिटर्न का आकलन किया जा सके।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कमोडिटी की वोलाटिलिटी है। याद रखें, सोने-चांदी के दाम ग्लोबल फैक्टर्स जैसे US ट्रेजरी यील्ड पर निर्भर करते हैं। इसलिए, पुराने रिटर्न को देखकर निवेश का फैसला लेने के बजाय पोर्टफोलियो के बैलेंस पर नजर रखना जरूरी है।
