जून के महीने में निवेशकों ने मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स में **₹4,811 करोड़** का भारी निवेश किया है। इस कदम के पीछे का मुख्य कारण बाजार की बढ़ती अस्थिरता के बीच विविधीकरण (diversification) के ज़रिए सुरक्षा हासिल करना है। ये फंड इक्विटी, डेट और गोल्ड जैसी विभिन्न एसेट क्लास में निवेश करके जोखिम को संतुलित करने का काम करते हैं।
मल्टी-एसेट फंड्स में क्यों बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी?
मल्टी-एसेट एलोकेशन म्यूचुअल फंड्स ने जून में निवेशकों का खूब ध्यान खींचा, जिसके चलते इनमें ₹4,811 करोड़ का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। ये फंड कम से कम तीन अलग-अलग एसेट क्लास, जैसे कि स्टॉक्स, बॉन्ड्स और गोल्ड, में निवेश करते हैं। बाजार में जब ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है, तो यह फंड्स जोखिम को फैलाने का एक पसंदीदा जरिया बन गए हैं।
दरअसल, हाइब्रिड म्यूचुअल फंड कैटेगरी में आए कुल ₹12,893 करोड़ में से अकेले मल्टी-एसेट फंड्स और आर्बिट्राज फंड्स (जिनमें ₹5,799 करोड़ आए) ने 80% से ज्यादा हिस्सेदारी पर कब्जा कर लिया। यह साफ दिखाता है कि निवेशक शुद्ध इक्विटी फंड्स से दूरी बना रहे हैं, शायद अचानक आने वाली बाजार की गिरावट से बचने के लिए।
मल्टी-एसेट फंड्स कैसे काम करते हैं?
सेबी (SEBI) के नियमों के मुताबिक, मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड को कम से कम तीन अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करना अनिवार्य है। इन सभी एसेट क्लास का पोर्टफोलियो में कम से कम 10% हिस्सा होना चाहिए। इस स्ट्रक्चर का मुख्य उद्देश्य किसी एक एसेट क्लास में गिरावट के असर को कम करना है। उदाहरण के लिए, जब शेयर बाजार गिरता है, तो सोना या डेट इंस्ट्रूमेंट्स स्थिर रह सकते हैं या बढ़ भी सकते हैं, जिससे निवेश के कुल मूल्य को सहारा मिलता है। कुछ फंड विविधता को और बढ़ाने के लिए रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) और अंतरराष्ट्रीय स्टॉक्स में भी निवेश करते हैं।
फंड्स का प्रदर्शन और फंड मैनेजर की रणनीति
पिछले तीन सालों में इस कैटेगरी का प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा है। Nippon India Multi Asset Allocation Fund जैसी बड़ी स्कीम्स ने सालाना 19.92% का रिटर्न दिया है, जबकि SBI Multi Asset Allocation Fund और Aditya Birla Sun Life Multi Asset Allocation Fund ने क्रमशः 17.50% और 17.40% का रिटर्न दर्ज किया है। Motilal Oswal Multi Asset Allocation Fund ने भी 13.90% की डबल-डिजिट ग्रोथ दिखाई है।
हालांकि, ये आंकड़े काफी आकर्षक लग रहे हैं, लेकिन यह फंड मैनेजर द्वारा पोर्टफोलियो को रीबैलेंस (rebalance) करने की रणनीति पर बहुत निर्भर करता है। रीबैलेंसिंग का मतलब है सही समय पर एसेट्स को खरीदना और बेचना ताकि वांछित मिश्रण बना रहे। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि पिछला प्रदर्शन भविष्य में भी वैसा ही रिटर्न देगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
इन फंड्स की मौजूदा लोकप्रियता के बावजूद, वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को केवल हाल के रिटर्न पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए। हर मल्टी-एसेट फंड की अपनी अलग रणनीति होती है - कुछ स्टॉक्स को लेकर ज्यादा आक्रामक हो सकते हैं, जबकि अन्य डेट या गोल्ड पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं। इसलिए, किसी भी स्कीम में निवेश करने से पहले उसके विशिष्ट निवेश उद्देश्य की जांच करना महत्वपूर्ण है। निवेशकों को अपनी पूंजी लगाने से पहले फंड के जोखिम प्रोफाइल और ऐतिहासिक प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और इन विविध रणनीतियों की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती हैं।
