मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स ने जुलाई 2026 में **1.72 लाख** नए निवेशक खाते जोड़े, जिससे कुल संख्या बढ़कर **58.65 लाख** हो गई। निवेशक इन हाइब्रिड स्कीम्स को इक्विटी, डेट और कमोडिटी के मिश्रण के लिए चुन रहे हैं, जो बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान जोखिम को संतुलित करने में मदद करते हैं। इस कैटेगरी के कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) **₹2.03 लाख करोड़** तक पहुंच गए, जो पिछले साल की तुलना में **58.3%** की ग्रोथ दर्शाते हैं।
निवेशकों का भरोसा बढ़ा
भारतीय निवेशकों ने जुलाई 2026 में मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स के प्रति अपना मजबूत रुझान जारी रखा। इस कैटेगरी में 1.72 लाख नए फोलियो जुड़े, जिससे कुल फोलियो की संख्या 58.65 लाख तक पहुंच गई। यह एक ऐसे निवेश स्ट्रैटेजी की ओर बदलाव को दर्शाता है जो किसी एक एसेट क्लास पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय संतुलन प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।
AUM में शानदार वृद्धि
इन फंड्स में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। जुलाई में कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹2.03 लाख करोड़ रहा। यह पिछले महीने से 3.6% की बढ़ोतरी और पिछले साल की तुलना में 58.3% की उल्लेखनीय वृद्धि है। इस ग्रोथ का मुख्य कारण इन स्कीम्स की बनावट है, जिसके तहत मार्केट रेगुलेटर SEBI द्वारा न्यूनतम तीन एसेट क्लास - आमतौर पर इक्विटी, डेट और सोना या चांदी - में प्रत्येक में कम से कम 10% निवेश करना अनिवार्य है।
जोखिम प्रबंधन की अपील
कई निवेशकों के लिए, इन फंड्स की अपील जोखिम प्रबंधन की क्षमता में निहित है। विभिन्न एसेट क्लास में निवेश फैलाकर, ये फंड किसी एक क्षेत्र में अस्थिरता के प्रभाव को कम करने का लक्ष्य रखते हैं। जब इक्विटी मार्केट दबाव में होता है, तो डेट या कमोडिटी (जैसे सोना) के घटक एक कुशन के रूप में काम कर सकते हैं, जिससे लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिल सकता है। यह डाइवर्सिफिकेशन खास तौर पर तब प्रासंगिक हो गया है जब रिटेल निवेशक बाजार में गिरावट के जोखिम को कम करते हुए ग्रोथ में भाग लेने के तरीके तलाश रहे हैं।
जोखिमों को समझना जरूरी
हालांकि इस कैटेगरी ने काफी इनफ्लो आकर्षित किया है, लेकिन निवेशकों के लिए इसमें शामिल जोखिमों को समझना महत्वपूर्ण है। ये फंड मार्केट के उतार-चढ़ाव से अछूते नहीं हैं। चूंकि इनमें इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं, इसलिए वे उन बाजारों के अंतर्निहित जोखिमों के संपर्क में आते हैं। इक्विटी से जुड़ी अस्थिरता शॉर्ट-टर्म परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकती है, जबकि ब्याज दरों में बदलाव पोर्टफोलियो के डेट हिस्से के मूल्यांकन को प्रभावित कर सकता है।
फंड मैनेजर की रणनीति
इसके अलावा, इन फंड्स का प्रदर्शन फंड मैनेजर द्वारा अपनाई गई रणनीति के आधार पर काफी भिन्न हो सकता है। चूंकि विभिन्न स्कीम्स में इक्विटी, डेट और कमोडिटी का अनुपात अलग-अलग हो सकता है, इसलिए सभी मल्टी-एसेट फंड्स में रिटर्न एक समान नहीं होगा।
आगे क्या?
जैसे-जैसे म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री बढ़ती जा रही है, हाइब्रिड स्ट्रैटेजी की लोकप्रियता रिटेल निवेशकों के बीच पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के प्रति बढ़ती जागरूकता के व्यापक रुझान को दर्शाती है। इस कैटेगरी को ट्रैक करने वाले निवेशकों को यह देखना चाहिए कि ये फंड उच्च बाजार अस्थिरता और बदलती ब्याज दरों की अवधि के दौरान कैसा प्रदर्शन करते हैं, क्योंकि ये कारक अंतर्निहित संपत्तियों के प्रदर्शन को मुख्य रूप से प्रभावित करते रहेंगे।
