Multi-Asset Funds: एक ही नाम, पर जोखिम में बड़ा अंतर! जानें क्यों?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Multi-Asset Funds: एक ही नाम, पर जोखिम में बड़ा अंतर! जानें क्यों?
Overview

क्या आप जानते हैं कि 'मल्टी-एसेट फंड' के नाम पर खरीदे जाने वाले फंड्स में इक्विटी का एक्सपोजर **36%** से लेकर **74%** तक और गोल्ड होल्डिंग **5%** से **13%** तक हो सकती है? यह बड़ा अंतर बताता है कि यह कैटेगरी एक जैसी रणनीति नहीं अपनाती, जिससे निवेशकों को अलग-अलग वोलेटिलिटी (Volatility) प्रोफाइल का सामना करना पड़ सकता है, भले ही फंड एक ही क्लासिफिकेशन में हों।

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एक समान दिखने वाली कैटेगरी का सच

आजकल निवेशक डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) के लिए मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स को एक आसान ऑल-इन-वन सॉल्यूशन के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन, मौजूदा रेगुलेटरी नियमों के तहत, फंड्स को कम से कम तीन एसेट क्लास में 10% निवेश करना होता है, जिससे उन्हें फ्लेक्सिबिलिटी (Flexibility) मिलती है। इसी वजह से, एक ही कैटेगरी लेबल वाले फंड्स असल में बहुत अलग तरीके से काम करते हैं। टॉप फंड्स के पोर्टफोलियो कंस्ट्रक्शन में ये बड़े अंतर सिर्फ कागजी नहीं हैं, बल्कि ये अलग-अलग मार्केट साइकल्स में रिस्क को मैनेज करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव दिखाते हैं।

इक्विटी एक्सपोजर में बड़ा गैप

इस कैटेगरी में फंड्स के बीच परफॉर्मेंस का अंतर अक्सर उनके इक्विटी, डेट और कमोडिटी रेशियो (Ratio) की वजह से होता है। एक बड़ा उदाहरण है HSBC Multi Asset Allocation Fund या Kotak Multi Asset Allocation Fund जैसे फंड्स, जिनमें इक्विटी एक्सपोजर 70% से ज़्यादा हो सकता है। वहीं, DSP Multi Asset Allocation Fund जैसे कंज़र्वेटिव फंड्स इक्विटी में काफी कम निवेश रखते हैं और दूसरे एसेट्स को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में, एक फंड आक्रामक हाइब्रिड (Hybrid) प्रोडक्ट की तरह काम करता है, जबकि दूसरा डिफेंसिव (Defensive) और इनकम-ओरिएंटेड (Income-oriented) व्हीकल की तरह। अक्सर मार्केटिंग मैटेरियल्स में दिए गए एवरेज एलोकेशन (Allocation) के आंकड़े इन बड़े अंतरों को छुपा देते हैं, जिससे निवेशकों को तब हैरानी होती है जब फंड उनकी उम्मीदों के मुताबिक जोखिम पर खरा नहीं उतरता।

कमोडिटी और परफॉर्मेंस का खेल

गोल्ड और सिल्वर में निवेश भी मल्टी-एसेट स्ट्रेटेजी (Strategy) में एक अहम अंतर पैदा करता है। जहां कुछ फंड इक्विटी मार्केट की वोलेटिलिटी से बचाव के लिए प्रीशियस मेटल्स (Precious Metals) का इस्तेमाल करते हैं, वहीं कुछ फंड कमोडिटी को सेकेंडरी (Secondary) मानते हैं। लेटेस्ट डेटा दिखाता है कि टॉप परफॉर्मिंग स्कीम्स (Schemes) में गोल्ड का एलोकेशन एक जैसा नहीं होता। कुछ मैनेजर्स ने गोल्ड में 5% से कम एक्सपोजर के साथ भी अच्छा रिटर्न दिया है, जबकि कुछ इक्विटी में ठहराव के दौरान कमोडिटी पर ज़्यादा निर्भर करते हैं। यह बताता है कि इस कैटेगरी की हालिया लोकप्रियता एक्टिव मैनेजमेंट (Active Management) की क्षमता से ज़्यादा प्रेरित है, जो किसी भी लीडिंग एसेट क्लास की ओर झुकाव दिखा सकती है, न कि किसी फिक्स्ड एलोकेशन स्ट्रेटेजी से।

जोखिम का फोरेंसिक एनालिसिस (Forensic Analysis)

मल्टी-एसेट कैटेगरी की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि अगर फंड मैनेजर का किसी खास एसेट क्लास पर लगाया दांव फेल हो जाता है और साथ ही मार्केट में व्यापक गिरावट आती है, तो फंड को बड़ा नुकसान हो सकता है। चूंकि इन फंड्स को कई एसेट्स में मिनिमम परसेंटेज निवेश करना ज़रूरी होता है, इसलिए वे किसी बड़ी गिरावट के समय कैश (Cash) या प्योर डेट (Pure Debt) में जाने में असमर्थ होते हैं। निवेशकों को 'डाइवर्सिफिकेशन की लागत' से भी सावधान रहना चाहिए; हाई एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio), जो अक्सर एक्टिव रीबैलेंसिंग (Rebalancing) और विभिन्न होल्डिंग्स को मैनेज करने के लिए ज़रूरी होते हैं, पैसिव इंस्ट्रूमेंट्स (Passive Instruments) की तुलना में रिटर्न को कम कर सकते हैं। इसके अलावा, एक्टिव मैनेजमेंट पर निर्भरता का मतलब है कि परफॉर्मेंस मैनेजर के टेन्योर (Tenure) और कई, अन कोरिलेटेड मार्केट एनवायरनमेंट (Uncorrelated Market Environments) को नेविगेट करने के उनके पिछले ट्रैक रिकॉर्ड (Track Record) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। इंडेक्स-लिंक्ड स्ट्रेटेजी के विपरीत, मल्टी-एसेट अप्रोच पूरी तरह से फर्म के इकोनॉमिक साइकिल (Economic Cycle) के प्रोप्राइटरी व्यू (Proprietary View) पर निर्भर करता है, जो ह्यूमन-ड्रिवन रिस्क (Human-driven Risk) की एक परत जोड़ता है जिसे निवेशक अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.