Motilal Oswal ELSS Tax Saver Fund ने 3 साल में **21.5%** का शानदार CAGR दर्ज कर अपने सेगमेंट में बाजी मारी है। हालांकि, अलग-अलग टाइमफ्रेम पर फंड्स की परफॉर्मेंस बदलती रहती है। निवेशकों को 3 साल के लॉक-इन पीरियड और मार्केट के जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए।
3 साल में इस फंड ने मचाया धमाल!
इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) कैटेगरी में Motilal Oswal ELSS Tax Saver Fund ने बाजी मार ली है। अगस्त 2026 तक के 3-साल के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) के आंकड़ों के अनुसार, इस फंड ने 21.5% का ज़बरदस्त रिटर्न दिया है। इसने HSBC ELSS Tax Saver Fund ( 17.4% ) और Quant ELSS Tax Saver Fund ( 15.9% ) जैसे फंड्स को पीछे छोड़ दिया। यह रैंकिंग उन फंड्स के लिए है जिनका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा है।
बेंचमार्क को भी पछाड़ा
Motilal Oswal फंड ने अपने बेंचमार्क, Nifty 500 Total Return Index (TRI) को भी लगातार मात दी है। जहां फंड ने 3 साल में 21.5% का रिटर्न दिया, वहीं बेंचमार्क 9.2% ही दे पाया। इससे पता चलता है कि फंड मीडियम टर्म में मार्केट से बेहतर रिटर्न देने में सक्षम है।
परफॉर्मेंस में रहती है उठा-पटक
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ELSS कैटेगरी में टॉप पोजीशन फिक्स नहीं रहती, यह समय के साथ बदलती रहती है। Motilal Oswal फंड 3-साल की परफॉर्मेंस में भले ही आगे हो, लेकिन छोटे समय के लिए दूसरी स्कीमें लीड कर रही हैं। Quant ELSS Tax Saver Fund 1-साल और 3-महीने की अवधि में आगे रहा, जबकि HSBC ELSS Tax Saver Fund ने 1-महीने में अच्छा प्रदर्शन किया। इससे यह साफ है कि किसी फंड को सिर्फ एक टाइम पीरियड की रैंकिंग से नहीं आंकना चाहिए।
बड़े फंड का मतलब ज़्यादा रिटर्न नहीं
यह भी देखा गया है कि बड़े AUM वाले फंड्स हमेशा ज़्यादा रिटर्न नहीं देते। SBI ELSS Tax Saver Fund, जिसका AUM ₹32,300 करोड़ से ज़्यादा है, का 3-साल का CAGR सिर्फ 15.8% रहा, जो कुछ छोटे फंड्स से कम है। इसलिए, फंड के साइज़ के अलावा उसकी परफॉर्मेंस पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।
ज़रूरी बातें
ELSS फंड में 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है, यानी आप पैसा तुरंत नहीं निकाल सकते। इक्विटी निवेश में बाज़ार का जोखिम हमेशा बना रहता है। साथ ही, टैक्स नियमों में बदलाव, जैसे ₹1.25 लाख से ज़्यादा के मुनाफे पर 12.5% का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स, आपके नेट रिटर्न को प्रभावित कर सकता है। फंड चुनते समय उसकी परफॉर्मेंस की कंसिस्टेंसी, एक्सपेंस रेशियो (रेगुलर प्लान के लिए लगभग 2.11%) और बाज़ार के उतार-चढ़ाव को संभालने की फंड मैनेजर की क्षमता पर गौर करें।
