Motilal Oswal ELSS Tax Saver Fund ने पिछले तीन सालों में **20.1%** का शानदार कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया है, जो इसके बेंचमार्क से **12%** ज्यादा है। जहां यह फंड लॉन्ग-टर्म परफॉरमेंस में सबसे आगे है, वहीं छोटे समय जैसे एक महीने या एक साल के नज़रिये से देखने पर Quant ELSS Tax Saver Fund जैसे दूसरे लीडर सामने आते हैं। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन समय के साथ काफी बदलता रहता है।
Motilal Oswal ELSS Fund का दबदबा
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) कैटेगरी में Motilal Oswal ELSS Tax Saver Fund ने अपनी खास जगह बनाई है। पिछले तीन सालों में इस फंड ने 20.1% का तगड़ा CAGR दिया है। यह रिटर्न इसके बेंचमार्क के 8.2% रिटर्न से काफी ज़्यादा है, यानी 12% पॉइंट्स का बड़ा अंतर। सिर्फ यही नहीं, एक साल के समय में भी फंड ने अपने बेंचमार्क को 6% पॉइंट्स से पीछे छोड़ा, जबकि बेंचमार्क का रिटर्न -1.7% रहा।
अलग-अलग समय में प्रदर्शन का अंतर
हालांकि, तीन साल का प्रदर्शन मजबूत लॉन्ग-टर्म ग्रोथ दिखाता है, लेकिन ELSS कैटेगरी में लीडरशिप अलग-अलग समय-सीमाओं के हिसाब से बदलती रहती है। उदाहरण के लिए, Quant ELSS Tax Saver Fund ने छोटे समय में बेहतरीन परफॉरमेंस दिखाई है। इसने एक साल के चार्ट्स में 13% रिटर्न के साथ टॉप किया है और तीन महीने की अवधि में 5.1% का बढ़त हासिल की है। वहीं, HSBC ELSS Tax Saver Fund ने बाज़ार की उठापटक के बीच एक महीने में 0% रिटर्न के साथ अपनी जगह बनाए रखी।
एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) और निवेशक की सोच
इन स्कीम्स का मूल्यांकन करते समय, निवेशक अक्सर ऐतिहासिक रिटर्न और फंड के आकार (AUM) दोनों पर गौर करते हैं। बड़े फंड्स में, SBI ELSS Tax Saver Fund का AUM ₹31,839.3 करोड़ है, लेकिन इसका तीन साल का रिटर्न 15.4% रहा। HSBC ELSS Tax Saver Fund भी 15.9% के तीन साल के CAGR के साथ एक महत्वपूर्ण दावेदार है।
ये आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ एक समय-सीमा के आधार पर टैक्स-सेविंग फंड चुनना भ्रामक हो सकता है। चूंकि ELSS फंड में तीन साल की लॉक-इन अवधि अनिवार्य है, इसलिए लॉन्ग-टर्म में लगातार अच्छा प्रदर्शन ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है। रैंकिंग में यह अंतर बताता है कि मार्केट साइकल्स अलग-अलग इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी को अलग-अलग तरह से प्रभावित करते हैं। नए निवेशकों को सिर्फ मौजूदा टॉप-परफॉर्मिंग स्कीम पर ध्यान देने के बजाय, फंड मैनेजर की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए कि वह विभिन्न मार्केट फेज़ के दौरान इन रिटर्न्स को कैसे बनाए रखता है। इसके अलावा, फंड के एक्सपेंस रेश्यो, पोर्टफोलियो टर्नओवर और मार्केट की अस्थिरता के दौरान फंड मैनेजर की रणनीति में किसी भी बदलाव पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।
