SIP Inflows: ₹30,000 करोड़ पर स्थिर! बाजार की उथल-पुथल के बीच भी निवेशक डटे

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
SIP Inflows: ₹30,000 करोड़ पर स्थिर! बाजार की उथल-पुथल के बीच भी निवेशक डटे

भारतीय म्यूचुअल फंड निवेशकों का सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश जारी है, जो हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ के आंकड़े पर बना हुआ है। ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों के पैसे निकालने के बावजूद, मई के बाद से नए SIP रजिस्ट्रेशन, बंद होने वाले अकाउंट्स से आगे निकल गए हैं। यह दिखाता है कि रिटेल निवेशकों का ध्यान लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन पर है, और छोटे शहरों से भी भागीदारी बढ़ रही है।

₹30,000 करोड़ पर स्थिर SIP इनफ्लो

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में रिटेल निवेशकों की तरफ से सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए लगातार निवेश देखने को मिल रहा है। लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, मंथली इनफ्लो लगभग ₹30,000 करोड़ पर स्थिर बना हुआ है। यह स्थिरता ऐसे समय में आई है जब ग्लोबल लेवल पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन, बढ़ती महंगाई और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) की बिकवाली जैसे कई फैक्टर मार्केट को प्रभावित कर रहे हैं।

नए SIP रजिस्ट्रेशन में वापसी

साल की शुरुआत में मार्च और अप्रैल के महीनों में जहां SIP अकाउंट्स के बंद होने की संख्या, नए खुलने वाले अकाउंट्स से ज्यादा थी, वहीं मई में हालात बदल गए। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (Amfi) के अनुसार, तब से नए SIP रजिस्ट्रेशन, बंद होने वाले अकाउंट्स से आगे निकल गए हैं। Amfi के CEO वेंकट नगेस्वर चालासेनी ने कहा कि निवेशक अपना डिसिप्लिन बनाए हुए हैं। कई अकाउंट्स बंद होने का कारण या तो निवेशकों का अपना फाइनेंशियल गोल पूरा करना है या फिर पोर्टफोलियो को री-बैलेंस करना है, न कि मार्केट के डर से बाहर निकलना।

लॉन्ग-टर्म डिसिप्लिन और स्ट्रैटेजी

लगातार हो रहे इनफ्लो का मुख्य कारण 'रूपी-कॉस्ट एवरेजिंग' (Rupee-Cost Averaging) की बढ़ती समझ है। इसमें निवेशक नियमित रूप से एक फिक्स्ड अमाउंट इन्वेस्ट करते हैं, जिससे मार्केट प्राइस कम होने पर ज्यादा यूनिट्स खरीदे जाते हैं। इससे समय के साथ इन्वेस्टमेंट की कॉस्ट एवरेज हो जाती है। 2019 से 2024 के बीच मार्केट की उथल-पुथल के अनुभव ने इस डिसिप्लिन्ड बिहेवियर को और मजबूत किया है। इंडस्ट्री की फाइनेंशियल अवेयरनेस पहलों ने भी निवेशकों को शॉर्ट-टर्म करेक्शन को अनदेखा कर लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग पर फोकस करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

B30 शहरों में बढ़ रही पहुंच

म्यूचुअल फंड सेक्टर में एक और अहम बदलाव टॉप 30 शहरों (B30 Cities) के बाहर के क्षेत्रों का बढ़ता प्रभाव है। आंकड़ों से पता चलता है कि अब कुल SIP अकाउंट्स का लगभग 55% इन्हीं जगहों से आ रहा है। हालांकि इन एरिया से एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) अभी बड़े मेट्रो शहरों की तुलना में कम है, लेकिन नए अकाउंट्स की बढ़ती संख्या फाइनेंशियल पार्टिसिपेशन के ब्रॉड बेस का संकेत दे रही है। यह इंडस्ट्री की लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी के लिए जरूरी है क्योंकि यह देश के डेवलपिंग मार्केट्स में अपनी पैठ बढ़ा रही है। निवेशक यह देखना जारी रखेंगे कि मार्केट के उतार-चढ़ाव का नेट इनफ्लो पर क्या असर पड़ता है और आने वाले तिमाहियों में B30 शहरों से पार्टिसिपेशन अपनी ग्रोथ बनाए रख पाता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.