Abakkus Mutual Fund की नई रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट को टाइम करने की कोशिश आपके वेल्थ क्रिएशन पर भारी पड़ सकती है। **2005 से 2026** तक का डेटा बताता है कि अगर आप बाजार के सबसे अच्छे **50** दिन मिस कर देते हैं, तो आपका सालाना रिटर्न **13%** से घटकर मात्र **1%** रह जाएगा।
भारतीय शेयर बाजार के पिछले 21 सालों के डेटा का विश्लेषण यह साबित करता है कि बाजार को टाइम करने की कोशिश निवेशकों के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है। Abakkus Mutual Fund की रिसर्च में साफ हुआ है कि घबराहट में बाजार से बाहर निकलने वाले निवेशक अक्सर मार्केट की सबसे बड़ी तेजी का फायदा उठाने से चूक जाते हैं।
क्या कहता है डेटा?
अगर किसी निवेशक ने अप्रैल 2005 से अगस्त 2026 के बीच Nifty 50 Total Return Index में निवेश बनाए रखा होता, तो उनका सालाना रिटर्न करीब 13.6% रहा होता। लेकिन, अगर आप केवल 5 सबसे बेहतरीन ट्रेडिंग दिन भी मिस कर देते, तो यह रिटर्न गिरकर 11.2% हो जाता। वहीं, अगर आप 50 अच्छे दिन छोड़ देते हैं, तो यह रिटर्न घटकर 1% के आसपास रह जाता है।
बाजार का 'रिकवरी' पैटर्न
बाजार में अक्सर सबसे बड़ी तेजी तब आती है, जब डर का माहौल अपने चरम पर होता है। अक्सर सबसे खराब दिनों के तुरंत बाद ही मार्केट में जोरदार रिकवरी (Rebound) देखने को मिलती है। जब निवेशक गिरते बाजार को देखकर अपना माल बेच देते हैं, तो वे उस रिकवरी का हिस्सा नहीं बन पाते। जब तक माहौल सामान्य होता है, शेयर की कीमतें काफी बढ़ चुकी होती हैं और दोबारा एंट्री करना महंगा पड़ता है।
सितंबर 2026 की स्थिति
फिलहाल, Nifty 50 अपने जनवरी के पीक से करीब 8.5% नीचे ट्रेड कर रहा है। बढ़ती हुई India VIX के कारण निवेशकों में घबराहट है, लेकिन इतिहास गवाह है कि डर के मारे बाहर निकलना हमेशा घाटे का सौदा रहा है। मार्केट में बने रहना और लंबी अवधि का नजरिया रखना ही वेल्थ बनाने का सबसे भरोसेमंद तरीका है।
