Mirae Asset NYSE FANG+ ETF Fund of Funds (FoF) विदेशी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में सबसे अव्वल रहा है। पिछले एक महीने में इस फंड ने **2.7%** का शानदार रिटर्न दिया है, जिसने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। **₹2,388.5 करोड़** से ज़्यादा की संपत्ति संभालने वाला यह फंड पिछले छह महीने और तीन साल में भी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। हालाँकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि विदेशी फंडों में करेंसी का जोखिम (Currency Risk) और ग्लोबल टेक स्टॉक्स में भारी भरकम निवेश का खतरा होता है।
Detailed Coverage
विदेशी फंडों में टॉप पर Mirae Asset NYSE FANG+ ETF FoF
Mirae Asset NYSE FANG+ ETF Fund of Funds (FoF) विदेशी म्यूचुअल फंड की दुनिया में सबसे आगे निकल गया है। 26 जुलाई, 2026 तक के एक महीने के पीरियड में इस फंड ने 2.7% का रिटर्न दर्ज किया है। ACE MF के डेटा के मुताबिक, यह उन विदेशी फंडों में सबसे अच्छा प्रदर्शन है जो ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति मैनेज कर रहे हैं।
दूसरे फंड्स से तुलना
जब हम एक जैसे स्केल वाले फंड्स की बात करते हैं, तो Mirae Asset के इस फंड ने Axis Global Equity Alpha FoF (जिसने 2.6% रिटर्न दिया) और HDFC Developed World Overseas Equity Passive FOF (जिसने 2.2% रिटर्न दिया) जैसे प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ दिया। Mirae Asset फंड एक महीने, छह महीने और तीन साल के पीरियड में सबसे आगे है, लेकिन निवेशकों का रिटर्न उनके निवेश की अवधि पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, Axis Greater China Equity FoF ने एक साल में 32.1% का रिटर्न देकर टॉप पोजिशन हासिल की है।
बेंचमार्क से बड़ा अंतर
इस फंड का प्रदर्शन इसके बेंचमार्क इंडेक्स से काफी अलग रहा है। पिछले एक महीने में, फंड ने 2.7% का रिटर्न दिया, जबकि इसका बेंचमार्क सिर्फ 0.0% पर था। यह बढ़त लंबे समय में भी जारी रही; फंड ने एक साल में 28.5% का रिटर्न दर्ज किया, जबकि इसके बेंचमार्क में 4.4% की बढ़ोतरी हुई थी, जो 24.1 प्रतिशत अंकों का बड़ा अंतर दिखाता है।
निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें और जोखिम
इस फंड में निवेश करने वाले निवेशकों को इसके निवेश की प्रकृति के बारे में पता होना चाहिए। यह फंड मुख्य रूप से FANG+ इंडेक्स में निवेश करता है, जिसमें कुछ बड़ी अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों का दबदबा है। इसका मतलब है कि फंड का प्रदर्शन कुछ बड़ी फर्मों के शेयर की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर बहुत ज़्यादा निर्भर करता है।
इसके अलावा, घरेलू म्यूचुअल फंडों के विपरीत, विदेशी फंड करेंसी के उतार-चढ़ाव के अधीन होते हैं। अगर भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होता है, तो अमेरिकी शेयरों के अच्छा प्रदर्शन करने पर भी अंतरराष्ट्रीय निवेश का रुपये में मूल्य कम हो सकता है। इन फंडों पर टैक्स भी इक्विटी फंडों से अलग होता है, क्योंकि वर्तमान भारतीय नियमों के तहत इन्हें टैक्स के लिए आमतौर पर डेट-ओरिएंटेड फंड माना जाता है।
भविष्य का प्रदर्शन ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेक्टर की लगातार ग्रोथ और USD-INR एक्सचेंज रेट की स्थिरता पर निर्भर करेगा। निवेशक अक्सर विदेशी बाजारों में एक्सपोजर पाने के लिए इन फंडों पर नज़र रखते हैं, लेकिन कुल मिलाकर अस्थिरता को मैनेज करने के लिए अपने घरेलू पोर्टफोलियो के साथ इसे संतुलित करना महत्वपूर्ण है।
