Mirae Asset Gold ETF ने पिछले 3 सालों में सालाना **34%** से ज़्यादा का रिटर्न दिया है। हाल के 3 महीनों में थोड़ी गिरावट (-1% के करीब) देखने को मिली है, लेकिन फंड का AUM **₹3,100 करोड़** के पार जा चुका है। निवेशकों को शॉर्ट-टर्म के उतार-चढ़ाव के बजाय ट्रैकिंग एरर और सोने की कीमतों पर ध्यान देना चाहिए।
लंबी अवधि में दमदार प्रदर्शन
Mirae Asset Gold ETF, जिसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹3,100 करोड़ से ज़्यादा है, भारतीय निवेशकों के लिए सोने में निवेश का एक अहम जरिया बना हुआ है, बिना फिजिकल सोना खरीदे। हालांकि, हाल के 3 महीनों में फंड के रिटर्न में करीब -1% की गिरावट आई है (अगस्त 2026 तक), लेकिन फंड के लॉन्ग-टर्म ट्रैक रिकॉर्ड पर नज़र डालें तो कहानी कुछ और है।
पिछले 1 साल में ETF ने 46% से 47% तक का रिटर्न दिया है, जबकि 3 साल की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 34.7% रही है। यह दिखाता है कि गोल्ड इन्वेस्टमेंट लंबी अवधि के मैक्रोइकॉनॉमिक ट्रेंड्स से ज़्यादा प्रभावित होते हैं, न कि छोटे-मोटे मार्केट मूवमेंट्स से। सोने की कीमतें अक्सर ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन, सेंट्रल बैंक की खरीद और डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती जैसे फैक्टर्स से तय होती हैं।
निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें
ETF जैसे पैसिव फंड में निवेश करने वालों के लिए 'ट्रैकिंग एरर' एक बड़ा परफॉरमेंस मीट्रिक है। यह फंड और उसके अंडरलाइंग एसेट (यानी फिजिकल गोल्ड) के प्रदर्शन के बीच का अंतर होता है। Mirae Asset Gold ETF ने अलग-अलग समय में अपने बेंचमार्क को आउटपरफॉर्म किया है। निवेशकों को ट्रैकिंग एरर के साथ-साथ एक्सपेंस रेश्यो पर भी नज़र रखनी चाहिए, जो फिलहाल 0.30% से 0.35% के आसपास है। कम ट्रैकिंग एरर का मतलब है कि फंड गोल्ड की कीमतों को ज़्यादा प्रभावी ढंग से ट्रैक कर रहा है।
लिक्विडिटी पर अपडेट
हाल ही में गोल्ड ETF स्पेस में लिक्विडिटी को लेकर कुछ चर्चाएं हुई थीं। जून 2026 में, कई एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने ₹25 करोड़ या उससे ज़्यादा के बड़े डायरेक्ट सब्सक्रिप्शन पर अस्थायी रोक लगा दी थी। यह समझना ज़रूरी है कि ये रोकें फंड की लिक्विडिटी मैनेज करने के लिए बड़े इंस्टीट्यूशनल इनफ्लोज़ पर लागू होती हैं। स्टॉक एक्सचेंजों के ज़रिए ट्रेडिंग पूरी तरह से सामान्य है, जिससे रिटेल निवेशक बिना किसी रुकावट के यूनिट्स खरीद-बेच सकते हैं।
आगे के लिए, निवेशकों को दो मुख्य बातों पर ध्यान देना चाहिए: पहला, सोने की कीमतों के मूवमेंट पर नज़र रखें, जो रिटर्न का मुख्य जरिया हैं। दूसरा, फंड की मंथली फैक्ट शीट्स में ट्रैकिंग एरर की कंसिस्टेंसी को मॉनिटर करें। गोल्ड की कीमतें इंटरेस्ट रेट में बदलाव और ग्लोबल वोलेटिलिटी के प्रति संवेदनशील होती हैं, इसलिए गोल्ड ETF का प्रदर्शन अलग-अलग टाइम हॉराइजन पर काफी अलग हो सकता है, जो इसे लंबी अवधि के निवेश के लिए बेहतर बनाता है।
