Mirae Asset के NYSE FANG+ ETF Fund of Fund ने पिछले तीन महीनों में **10.2%** का रिटर्न दर्ज किया है, जो विदेशी फंड्स की कैटेगरी में अपने साथियों से बेहतर प्रदर्शन है। हालांकि, यह शॉर्ट-टर्म परफॉरमेंस तो अच्छी है, लेकिन निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि इस फंड का रिस्क लेवल 'बहुत ज़्यादा' है। इसकी वजह बड़ी टेक कंपनियों में इसका केंद्रित निवेश और करेंसी में उतार-चढ़ाव के प्रति इसकी संवेदनशीलता है।
विदेशी फंड्स में Mirae Asset का जलवा
Mirae Asset NYSE FANG+ ETF Fund of Fund (FoF) ने अगस्त 2026 की शुरुआत तक के तीन महीनों में विदेशी फंड-ऑफ-फंड्स (FoF) में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। फंड ने 10.2% का रिटर्न हासिल किया, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी लार्ज-कैप टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में हालिया तेजी रही।
यह फंड कैसे काम करता है?
यह फंड एक 'फंड-ऑफ-फंड्स' है। इसका मतलब है कि यह निवेशकों के पैसे को इकट्ठा करके किसी दूसरे फंड, यानी Mirae Asset NYSE FANG+ ETF की यूनिट्स में निवेश करता है। यह अंडरलाइंग ETF, NYSE FANG+ इंडेक्स को ट्रैक करता है। इस इंडेक्स में 10 सबसे ज़्यादा लिक्विड, इनोवेटिव टेक्नोलॉजी और इंटरनेट-मीडिया कंपनियां शामिल हैं। चूँकि पोर्टफोलियो सिर्फ इन 10 स्टॉक्स तक सीमित है, इसलिए यह फंड किसी ब्रॉड मार्केट इंडेक्स फंड से काफी अलग व्यवहार करता है।
शॉर्ट-टर्म रिटर्न और जोखिम
भले ही 10.2% का रिटर्न इसे Axis Global Equity Alpha FoF और HDFC Developed World Overseas Equity Passive FoF जैसे अन्य फंड्स से बेहतर दिखाता है, लेकिन निवेशकों को शॉर्ट-टर्म रिटर्न के पीछे भागने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
इस फंड का परफॉरमेंस बहुत केंद्रित है। जब अमेरिका में टेक्नोलॉजी और इंटरनेट सेक्टर अच्छा प्रदर्शन करता है, तो फंड ज़बरदस्त नतीजे देता है। लेकिन, व्यापक इंडेक्स (जैसे S&P 500 या Nasdaq 100) की तरह डाइवर्सिफिकेशन की कमी के कारण, अगर इन खास टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में बिकवाली का दबाव या कोई नकारात्मक खबर आती है, तो इसमें भारी गिरावट का जोखिम भी उतना ही ज़्यादा होता है। फंड की 'बहुत ज़्यादा' (Very High) रिस्क प्रोफाइल इसी सेक्टर डाइवर्सिफिकेशन की कमी को दर्शाती है।
करेंसी का भी है असर
एक और चीज़ जिस पर निवेशकों को नज़र रखनी चाहिए, वह है करेंसी का जोखिम। चूंकि अंडरलाइंग निवेश अमेरिकी डॉलर में हैं, इसलिए भारत में फंड के प्रदर्शन पर भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर के एक्सचेंज रेट का भी असर पड़ता है। अगर रुपया मजबूत होता है, तो अमेरिकी स्टॉक्स अच्छा प्रदर्शन करने पर भी भारतीय निवेशकों के लिए रिटर्न कम हो सकता है। वहीं, रुपया कमजोर होने पर रिटर्न बढ़ सकता है।
निवेश की लागत और अवधि
कुछ व्यावहारिक खर्चे भी हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है। अगर निवेश की तारीख से तीन महीने के अंदर यूनिट्स को रिडीम किया जाता है, तो स्कीम पर 0.50% का एग्जिट लोड लगता है। इससे पता चलता है कि यह फंड उन निवेशकों के लिए है जो लंबे समय का नज़रिया रखते हैं, न कि उन लोगों के लिए जो शॉर्ट-टर्म मूवमेंट के आधार पर मार्केट में ट्रेड करना चाहते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोजर को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करने वाले निवेशकों को हाल के तीन महीनों के प्रदर्शन से आगे देखना चाहिए। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले, अपनी व्यक्तिगत जोखिम सहनशीलता का मूल्यांकन करना और यह सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है कि ऐसा केंद्रित, उच्च-जोखिम वाला फंड आपके दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप हो।
