Mirae Asset Equity Savings Fund ने 3 साल में **9.8%** रिटर्न देकर बाजी मारी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Mirae Asset Equity Savings Fund ने 3 साल में **9.8%** रिटर्न देकर बाजी मारी

Mirae Asset Equity Savings Fund ने इक्विटी-सेविंग फंड कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 साल में **9.8%** का रिटर्न दिया है। यह लगातार लंबी अवधि की ग्रोथ को दर्शाता है, लेकिन निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे सिर्फ रिटर्न के बजाय इन फंडों की इक्विटी, डेट और आर्बिट्रेज की मिली-जुली स्ट्रैटेजी पर भी गौर करें।

क्या हुआ?

29 जून, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, Mirae Asset Equity Savings Fund ने इक्विटी-सेविंग म्यूचुअल फंड्स में टॉप पोजीशन हासिल की है। इस फंड ने 3 साल में 9.8% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया है। यह रैंकिंग ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा एसेट्स अंडर मैनेजमेंट वाले स्कीम्स के लिए की गई है। इस 3-साल की अवधि में फंड ने अपने बेंचमार्क को 3.1% पॉइंट्स पीछे छोड़ा, जहाँ बेंचमार्क ने 6.7% का रिटर्न दिया था। इस कैटेगरी में Kotak Equity Savings Fund 9.2% रिटर्न के साथ और SBI Equity Savings Fund भी 9.2% रिटर्न के साथ क्लोज कॉम्पिटिटर रहे।

इक्विटी सेविंग फंड्स कैसे काम करते हैं?

इक्विटी सेविंग फंड्स एक खास तरह के हाइब्रिड म्यूचुअल फंड होते हैं। ये तीन अलग-अलग एसेट क्लास: इक्विटी, डेट और आर्बिट्रेज में निवेश करते हैं। इनका मकसद प्योर इक्विटी फंड्स की तुलना में ज़्यादा स्मूथ इन्वेस्टमेंट अनुभव देना है। इक्विटी हिस्सा ग्रोथ की संभावना देता है, डेट हिस्सा स्थिरता प्रदान करता है, और आर्बिट्रेज कॉम्पोनेन्ट मार्केट की वोलेटिलिटी से हेजिंग (सुरक्षा) करने में मदद करता है, साथ ही टैक्स-एफिशिएंट रिटर्न भी दे सकता है। चूँकि ये फंड रिस्क कम करने के लिए कॉम्प्लेक्स स्ट्रैटेजीज़ का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए वे मार्केट में गिरावट के दौरान स्टैंडर्ड इक्विटी फंड्स से अलग व्यवहार करते हैं।

पियर्स परफॉर्मेंस और एसेट साइज़

हालांकि Mirae Asset Equity Savings Fund ने 3-साल की अवधि में बढ़त हासिल की, पर एसेट साइज़ और परफॉर्मेंस रैंकिंग अलग-अलग समय-सीमाओं में बदलती रहती है। टॉप 5 फंड्स में Kotak Equity Savings Fund सबसे बड़ा कॉर्पस मैनेज करता है, जो ₹10,108.2 करोड़ है। यह बड़ा एसेट बेस फंड को अच्छी लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद करता है, हालांकि बड़े फंड्स को छोटे फंड्स की तुलना में फुर्ती के मामले में अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इन फंड्स के बीच परफॉर्मेंस का अंतर काफी कम है, जो कैटेगरी में कड़ी प्रतिस्पर्धा का संकेत देता है।

शॉर्ट-टर्म बनाम लॉन्ग-टर्म का नज़रिया

आंकड़े बताते हैं कि शॉर्ट-टर्म परफॉर्मेंस में काफी उतार-चढ़ाव आ सकता है। उदाहरण के लिए, जहाँ Mirae Asset 3-साल के रिटर्न में आगे है, वहीं दूसरी फंड्स ने कम अवधि में टॉप चार्ट्स में जगह बनाई है। DSP Equity Savings Fund ने हाल ही में 1-महीने के रिटर्न में 1.5% के साथ टॉप स्पॉट हासिल किया, जबकि Kotak Equity Savings Fund ने 1-साल के रिटर्न में 4.0% के साथ बढ़त बनाई। यह भिन्नता बताती है कि फंड चुनते समय निवेशकों को केवल शॉर्ट-टर्म के स्नैपशॉट्स पर भरोसा क्यों नहीं करना चाहिए। जो स्ट्रैटेजीज़ एक ट्रेंडिंग मार्केट में काम करती हैं, वे शायद साइडवेज़ मार्केट में वैसा प्रदर्शन न करें, इसीलिए 3-साल या 5-साल का प्रदर्शन अक्सर फंड मैनेजर की कंसिस्टेंसी (निरंतरता) का बेहतर संकेतक होता है।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

इक्विटी सेविंग फंड्स को देखते समय, रिटर्न सिर्फ एक पहलू है। निवेशक एक्सपेंस रेशियो (शुल्क अनुपात) को ट्रैक करने पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि ज़्यादा फीस लंबे समय में रिटर्न को कम कर सकती है। फंड मैनेजर कितनी बार फंड के भीतर ट्रेड करता है, यह समझने के लिए पोर्टफोलियो टर्नओवर रेशियो की जांच करना भी उपयोगी है। इसके अतिरिक्त, फंड के एसेट एलोकेशन - यानी डेट बनाम इक्विटी में कितना हिस्सा रखा गया है - की निगरानी करने से निवेशकों को फंड के रिस्क प्रोफाइल को समझने में मदद मिलती है। अंत में, लेटेस्ट फैक्टशीट को पढ़ने से यह पुष्टि करने में मदद मिलती है कि फंड की स्ट्रैटेजी निवेशक की अपनी रिस्क टॉलरेंस और वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप है या नहीं।

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