Mid और Smallcap फंड्स का जलवा: AUM पहुँचा **₹10 लाख करोड़** के पार, निवेशकों के लिए क्या हैं खतरे?

MUTUAL-FUNDS
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Mid और Smallcap फंड्स का जलवा: AUM पहुँचा **₹10 लाख करोड़** के पार, निवेशकों के लिए क्या हैं खतरे?

भारतीय म्यूचुअल फंड बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मिड और स्मॉलकैप फंड्स का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) **₹10 लाख करोड़** के आंकड़े को पार कर गया है, जो **2021** के मुकाबले **4** गुना ज्यादा है।

निवेशकों की बदली पसंद

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। अब ये दोनों कैटेगरीज देश की कुल एक्टिव इक्विटी एसेट्स का 26% हिस्सा बन चुकी हैं। 2021 में जो AUM महज ₹2.5 लाख करोड़ था, वह अब अक्टूबर 2026 तक ₹10 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। रिटेल निवेशकों का भरोसा बड़े लार्जकैप फंड्स की तुलना में इन मिड और स्मॉलकैप फंड्स पर ज्यादा बढ़ा है।

साल-दर-साल (YTD) आंकड़ों पर नजर डालें तो, स्मॉलकैप फंड्स में ₹55,300 करोड़ और मिडकैप फंड्स में ₹51,295 करोड़ का नेट इनफ्लो आया है। इसके मुकाबले लार्जकैप फंड्स में केवल ₹11,690 करोड़ का निवेश हुआ है।

क्यों है रिस्क का साया?

इस ग्रोथ के पीछे की मुख्य वजह परफॉरमेंस का अंतर है। जहां Nifty 50 इंडेक्स में इस साल 13.1% की गिरावट आई है, वहीं Nifty Smallcap 250 इंडेक्स करीब 7% की बढ़त बनाए हुए है। हालांकि, Nifty Smallcap 250 का P/E रेशियो अभी 30.9 पर है, जो इसके 5 साल के औसत 28.2 से काफी ज्यादा है। इसका मतलब है कि बाजार अभी काफी महंगा है।

साथ ही, फंड मैनेजरों के सामने अब लिक्विडिटी की चुनौती भी खड़ी हो गई है। फंड्स का साइज बढ़ने के कारण अब किसी भी छोटे शेयर में एंट्री या एग्जिट करना आसान नहीं रहा, जिससे मार्केट में उतार-चढ़ाव (volatility) के दौरान रिस्क बढ़ सकता है।

भविष्य की राह

बाजार में आ रहे नए IPOs ने निवेश के मौके तो बढ़ाए हैं, लेकिन पावर, डिफेंस और डेटा सेंटर्स जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर्स में ऊंचे वैल्युएशन पर पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है। आने वाले समय में निवेशकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इतने बड़े साइज के साथ ये फंड्स मार्केट की गिरावट को झेल पाएंगे या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.