Mid-Cap, Small-Cap Funds में निवेशकों की बंपर एंट्री! जून 2026 तक 5.42 करोड़ हुए कुल फोलियो

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AuthorAditya Rao|Published at:
Mid-Cap, Small-Cap Funds में निवेशकों की बंपर एंट्री! जून 2026 तक 5.42 करोड़ हुए कुल फोलियो

रिटेल निवेशकों का भरोसा मिड-कैप (Mid-Cap) और स्मॉल-कैप (Small-Cap) म्यूचुअल फंड्स पर लगातार बढ़ रहा है। जून 2026 तक इन सेगमेंट में कुल फोलियो की संख्या **5.42 करोड़** पार कर गई है। हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि मौजूदा हाई वैल्यूएशन्स (Valuations) और धीमी अर्निंग ग्रोथ (Earnings Growth) के कारण भविष्य में वोलैटिलिटी (Volatility) बढ़ सकती है।

मिड-कैप और स्मॉल-कैप में रिकॉर्ड तोड़ निवेश

भारतीय रिटेल निवेशकों ने मिड-कैप और स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड्स में अपना निवेश बढ़ाना जारी रखा है। जून 2026 तक इन दोनों सेगमेंट में कुल निवेशक फोलियो की संख्या बढ़कर 5.42 करोड़ हो गई है। ICRA Analytics के आंकड़ों के मुताबिक, मिड-कैप फंड फोलियो 2.55 करोड़ तक पहुंच गए, जबकि स्मॉल-कैप फंड फोलियो 2.87 करोड़ दर्ज किए गए। यह दिखाता है कि छोटे और मध्यम आकार की भारतीय कंपनियों के लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन (Wealth Creation) की क्षमता में निवेशकों का भरोसा कितना मजबूत है।

SIP का कमाल: इनफ्लो मोमेंटम जारी

इस लगातार बढ़ते निवेश के पीछे सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) का बड़ा हाथ है। एक तय राशि का नियमित अंतराल पर निवेश करके, निवेशक रुपये की लागत औसत (Rupee-Cost Averaging) का फायदा उठा रहे हैं, जिससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है। इसी वजह से फंड हाउसेज को लगातार कैश फ्लो मिल रहा है। पिछले एक साल में, मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में औसतन लगभग ₹4,777 करोड़ और ₹4,776 करोड़ का मंथली नेट इनफ्लो (Net Inflow) आया है। यह दिखाता है कि बाजार में गिरावट के बावजूद, रिटेल निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ पर भरोसे के कारण बाहर नहीं निकले हैं।

लार्ज-कैप से प्रदर्शन का अंतर

ऐतिहासिक रूप से, मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स ने लार्ज-कैप फंड्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसने इन जोखिम भरे सेगमेंट में अधिक पूंजी आकर्षित की है। 30 जून 2026 तक, मिड-कैप फंड्स ने 18.76% का 3-साल का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया, जबकि स्मॉल-कैप फंड्स 17.68% पर रहे। वहीं, लार्ज-कैप फंड्स ने 10.65% का 3-साल का रिटर्न दिया। प्रदर्शन के इस अंतर के कारण एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में भी भारी बढ़ोतरी हुई है, जो जून 2026 तक मिड-कैप फंड्स के लिए ₹5.06 लाख करोड़ और स्मॉल-कैप फंड्स के लिए ₹4.30 लाख करोड़ था।

हाई वैल्यूएशन्स का रिस्क

सकारात्मक प्रदर्शन के बावजूद, वित्तीय विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों के शेयर की कीमतों में मौजूदा तेजी के कारण वैल्यूएशन्स काफी महंगे हो गए हैं। जब किसी कंपनी का स्टॉक प्राइस उसकी असल प्रॉफिट ग्रोथ से बहुत तेजी से बढ़ता है, तो उस स्टॉक के लिए भविष्य में अच्छा रिटर्न देना मुश्किल हो जाता है। अगर कॉर्पोरेट अर्निंग्स (Corporate Earnings) बाजार की उम्मीदों के मुताबिक नहीं बढ़ीं, तो इन फंड्स पर भारी दबाव आ सकता है। निवेशकों को यह देखना होगा कि पोर्टफोलियो की कंपनियां अपनी मौजूदा कीमतों को सही ठहराने के लिए मुनाफे में स्वस्थ दर से बढ़ोतरी जारी रख पाती हैं या नहीं। भविष्य में, इन कैटेगरी में रिटर्न मुख्य रूप से वास्तविक प्रॉफिट ग्रोथ से तय होंगे, न कि पिछली अवधि में देखे गए प्राइस-टू-अर्निंग्स (Price-to-Earnings) विस्तार से।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.