जून महीने में निवेशकों ने मिड-कैप म्यूचुअल फंड में **₹6,090 करोड़** डाले, जो पिछले महीने के मुकाबले **38.9%** ज़्यादा है। यह इस सेगमेंट में निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
इक्विटी म्यूचुअल फंड में जोरदार भागीदारी
जून में इक्विटी म्यूचुअल फंड ने निवेशकों की तरफ से शानदार भागीदारी देखी, जिसमें मिड-कैप स्कीमों ने सभी इक्विटी कैटेगरी में सबसे ज्यादा इनफ्लो दर्ज किया। निवेशकों ने इन फंडों में कुल ₹6,090 करोड़ का निवेश किया, जो मई में ₹4,385 करोड़ से काफी ज़्यादा है। यह दिखाता है कि निवेशक मिड-साइज़ कंपनियों की ओर झुक रहे हैं, जिनमें अक्सर लार्ज-कैप फर्मों की तुलना में ग्रोथ की ज्यादा उम्मीदें होती हैं, हालांकि इनमें ज्यादा वोलेटिलिटी (volatility) का जोखिम भी होता है।
टॉप फंड्स में अलग-अलग मैनेजमेंट स्टाइल
इन नए इनफ्लो को मैनेज करने में अलग-अलग फंड हाउस ने अपने तरीके अपनाए। HDFC Mid Cap Fund, जिसने ₹1,162 करोड़ का सबसे बड़ा हिस्सा आकर्षित किया, उसने 'बाय-एंड-होल्ड' (buy-and-hold) स्ट्रेटेजी अपनाई। 4.42% के कम टर्नओवर रेशियो (turnover ratio) के साथ, फंड मैनेजर ने मौजूदा पोर्टफोलियो में बहुत कम बदलाव किए और 63.21% संपत्ति मिड-कैप शेयरों में रखी। इसके विपरीत, HSBC Midcap Fund, जिसने ₹616 करोड़ जुटाए, 123% के बहुत ज़्यादा टर्नओवर रेशियो के साथ काम कर रहा था। यह बाजार में शॉर्ट-टर्म मौकों को भुनाने के लिए शेयरों की लगातार खरीद-बिक्री को दर्शाता है।
अन्य फंड्स ने भी ज़्यादा कैपिटल मिलने पर अपने पोर्टफोलियो को एडजस्ट किया। Nippon India Growth Mid Cap Fund ने Shree Cement और Bajaj Housing Finance जैसे स्टॉक जोड़े, जबकि ICICI Prudential AMC और Bayer CropScience में अपनी पोजीशन से बाहर निकल गया। वहीं, Kotak Midcap Fund ने बिना कोई मौजूदा पोजीशन बंद किए Emcure Pharmaceuticals और City Union Bank को जोड़कर अपनी होल्डिंग्स का विस्तार करने का फैसला किया। Edelweiss Mid Cap Fund ने दो अन्य स्टॉक्स, जिनमें Dabur India और National Aluminium Company शामिल थे, को बेचकर चार नए स्टॉक जोड़े।
निवेशकों के लिए जोखिम और ध्यान रखने योग्य बातें
हालांकि इनफ्लो सकारात्मक सेंटिमेंट (sentiment) का संकेत देते हैं, निवेशकों को मिड-कैप शेयरों की प्रकृति के बारे में पता होना चाहिए। इस सेगमेंट की कंपनियां अक्सर स्थापित लार्ज-कैप कंपनियों की तुलना में लिक्विडिटी (liquidity) और आर्थिक मंदी से जुड़े उच्च जोखिम का सामना करती हैं। विभिन्न फंडों में देखे गए टर्नओवर रेशियो यह दिखाते हैं कि जहां कुछ मैनेजर स्थिरता पसंद करते हैं, वहीं अन्य मार्केट बेंचमार्क को मात देने के लिए लगातार ट्रेडिंग करके जोखिम बढ़ा सकते हैं।
इसके अलावा, मिड-कैप फंडों में उच्च इनफ्लो कभी-कभी फंड मैनेजरों को सीमित संख्या में क्वालिटी स्टॉक्स में कैपिटल लगाने के लिए मजबूर कर सकते हैं, जो उन विशिष्ट कंपनियों के वैल्यूएशन (valuations) को बढ़ा सकते हैं। इन फंडों की निगरानी करने वाले निवेशकों को टर्नओवर रेशियो और फंड की रणनीति की निरंतरता को ट्रैक करना चाहिए। ज़्यादा टर्नओवर रेशियो से अक्सर लेनदेन की लागत बढ़ जाती है, जो लंबी अवधि में निवेशकों के नेट रिटर्न को प्रभावित कर सकती है। भविष्य में देखने वाली बातों में पोर्टफोलियो बदलावों का तिमाही खुलासा और यह देखना शामिल है कि क्या मिड-कैप वैल्यूएशन इन उच्च निवेश स्तरों का समर्थन करते रहेंगे।
