Mid-Cap Funds में ₹6,192 करोड़ का निवेश, Large-Caps से निकली रकम

MUTUAL-FUNDS
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Mid-Cap Funds में ₹6,192 करोड़ का निवेश, Large-Caps से निकली रकम

भारतीय निवेशकों ने जुलाई 2026 में मिड-कैप फंड्स में ₹6,192 करोड़ और स्मॉल-कैप स्कीम्स में ₹7,768 करोड़ डाले। हालांकि, SIP का योगदान रिकॉर्ड ₹31,961 करोड़ रहा, लेकिन लार्ज-कैप फंड्स में 30 महीनों में पहली बार नेट आउटफ्लो देखा गया। यह बदलाव निवेशकों की बदलती पसंद को दिखाता है।

जुलाई 2026 में म्यूचुअल फंड्स का हाल: मिड और स्मॉल-कैप की धूम!

साल 2026 के जुलाई महीने में भारतीय म्यूचुअल फंड निवेशकों का रुझान मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स की ओर साफ दिखा। इस दौरान मिड-कैप फंड्स में ₹6,192 करोड़ का नेट इनफ्लो हुआ, जबकि स्मॉल-कैप फंड्स ने ₹7,768 करोड़ आकर्षित किए।

वहीं, लार्ज-कैप फंड्स के लिए यह महीना थोड़ा ठंडा रहा। इन फंड्स से ₹1,321 करोड़ का नेट आउटफ्लो देखा गया, जो पिछले 30 महीनों में पहली बार हुआ है। इसका मतलब है कि निवेशकों ने पहली बार लार्ज-कैप से पैसा निकालकर मिड और स्मॉल-कैप की ओर मोड़ा है।

इसके बावजूद, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने कमाल का प्रदर्शन जारी रखा। कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹85.76 लाख करोड़ के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया। साथ ही, मंथली SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) का कलेक्शन भी रिकॉर्ड ₹31,961 करोड़ रहा।

टॉप मिड-कैप फंड्स की अलग-अलग स्ट्रेटेजी

मिड-कैप फंड्स में लगातार इनफ्लो आ रहा है, लेकिन इन फंड्स को मैनेज करने के तरीके अलग-अलग हैं। टॉप 3 फंड्स - HDFC Mid Cap Fund, Nippon India Growth Mid Cap Fund, और Invesco India Midcap Fund - की स्ट्रेटेजी पर एक नज़र डालते हैं:

  • HDFC Mid Cap Fund: यह फंड स्थिरता पर ध्यान देता है। इसके पास 79 स्टॉक्स हैं और इसका टर्नओवर रेशियो 2.59% है। यह 'बाय एंड होल्ड' (खरीदो और रखो) वाली स्ट्रेटेजी अपनाता है और कैश में अच्छा-खासा पैसा रखता है।
  • Nippon India Growth Mid Cap Fund: यह फंड 100 स्टॉक्स में निवेश करके डायवर्सिफिकेशन (विविधता) को प्राथमिकता देता है। इसके पास कैश होल्डिंग बहुत कम है, मतलब यह लगभग पूरा निवेशित रहता है। इसका टर्नओवर रेशियो 12% है।
  • Invesco India Midcap Fund: यह फंड 41 स्टॉक्स के साथ कंसन्ट्रेटेड (केंद्रित) स्ट्रेटेजी पर चलता है। इसके टॉप 10 स्टॉक्स में पोर्टफोलियो का लगभग आधा पैसा लगा है। इसका टर्नओवर रेशियो 31% है, जो बताता है कि यह ज्यादा एक्टिव ट्रेडिंग करता है।

निवेश के रिस्क और बाजार का नज़रिया

इन अलग-अलग स्ट्रेटेजी का मतलब है कि हर मिड-कैप फंड का रिस्क अलग होता है। Invesco जैसा कंसन्ट्रेटेड फंड तेज़ी में ज्यादा रिटर्न दे सकता है, लेकिन अगर उसके टॉप स्टॉक्स अच्छा नहीं करते तो नुकसान भी बड़ा हो सकता है। वहीं, Nippon का डायवर्सिफाइड फंड ज्यादा स्थिर रह सकता है, पर किसी एक स्टॉक के बड़े उछाल का फायदा शायद कम मिले।

निवेशकों को वैल्यूएशन पर भी ध्यान देना चाहिए। मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स अभी अपने लॉन्ग-टर्म एवरेज से महंगे (Elevated P/E Ratio) पर ट्रेड कर रहे हैं। एक साथ कई निवेशक इन कैटेगरी में पैसा लगा रहे हैं, जिससे 'ओवरक्राउडिंग' का खतरा बढ़ रहा है। लार्ज-कैप से पैसा निकलने का एक कारण यह भी हो सकता है कि कुछ निवेशक पोर्टफोलियो को रीबैलेंस कर रहे हैं।

आगे चलकर, यह इनफ्लो कितना टिकाऊ रहेगा, यह बाजार के प्रदर्शन और फंड मैनेजर्स की इन हाई वैल्यूएशन्स को सही ठहराने की क्षमता पर निर्भर करेगा। निवेशकों को देखना होगा कि मिड और स्मॉल-कैप का यह ट्रेंड जारी रहता है या बाजार की अस्थिरता उन्हें वापस लार्ज-कैप की ओर ले जाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.