सितंबर में बाजार में आई सुस्ती के बावजूद मिड-कैप म्यूचुअल फंड्स (Mid-Cap Mutual Funds) में निवेशकों का भरोसा कायम रहा। इन स्कीम्स में **₹7,834 करोड़** का फ्रेश निवेश आया है, हालांकि बाजार में गिरावट की वजह से फंड्स के कुल AUM पर दबाव भी दिखा है।
AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में मिड-कैप सेगमेंट निवेशकों की पसंद बना रहा और स्मॉल-कैप के बाद यह दूसरी सबसे अधिक निवेश वाली कैटेगरी रही। हालांकि, बाजार में गिरावट का असर यह हुआ कि नई रकम आने के बावजूद कई फंड्स का कुल AUM (Assets Under Management) कम हो गया, क्योंकि मौजूदा होल्डिंग्स की वैल्यू में कमी आई।
फंड मैनेजर्स की अलग-अलग रणनीति
बाजार की कमजोरी के बीच अलग-अलग फंड्स का प्रदर्शन उनकी रणनीति पर टिका रहा। HDFC Mid Cap Fund में सबसे ज्यादा ₹1,303 करोड़ का निवेश आया। इस फंड ने 8.26% की कैश होल्डिंग रखी थी, जो गिरते बाजार में सतर्कता दिखाती है, हालांकि महीने के दौरान फंड के प्रदर्शन में 7.17% की गिरावट आई। इसके उलट, Nippon India Growth Mid Cap Fund ने ₹838 करोड़ जुटाए और 101 स्टॉक्स के डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो के साथ गिरावट को 5.61% तक सीमित रखने में सफलता पाई।
कंसंट्रेशन का रिस्क
Invesco India Midcap Fund ने ₹837 करोड़ जुटाए, लेकिन इसकी रणनीति अलग है। यह फंड 43 स्टॉक्स के साथ काम करता है, जिसमें 50% निवेश केवल टॉप 10 होल्डिंग्स में है। यह केंद्रित रणनीति बुल मार्केट में शानदार रिटर्न देती है, लेकिन बाजार की अस्थिरता के दौरान रिस्क भी बढ़ाती है। हालांकि, लंबे नजरिए से देखें तो इस फंड ने 3 साल में 20.71% का एनुअलाइज्ड रिटर्न दिया है।
निवेशकों के लिए सबक
महत्वपूर्ण यह है कि सिर्फ पैसा कहां जा रहा है, यह न देखें। निवेशकों को यह देखना चाहिए कि फंड मैनेजर कैश लेवल और स्टॉक सिलेक्शन के जरिए अस्थिरता को कैसे मैनेज कर रहे हैं। जिन फंड्स में कैश होल्डिंग ज्यादा है, वे गिरावट में खरीदारी के बेहतर मौके देख सकते हैं, जबकि डायवर्सिफाइड फंड्स व्यक्तिगत शेयरों के रिस्क को कम करने में मददगार होते हैं।
