अगस्त महीने में मिड-कैप म्यूचुअल फंड्स में ₹7,000 करोड़ का बड़ा निवेश हुआ है। जहां इक्विटी फंड्स में कुल ₹29,329 करोड़ का इनफ्लो दर्ज किया गया, वहीं दिग्गज फंड मैनेजर HDFC, Nippon India और Invesco की निवेश रणनीतियां काफी अलग दिखाई दे रही हैं।
अगस्त 2026 में भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए जबरदस्त दौर रहा। इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में कुल नेट इनफ्लो ₹29,329 करोड़ के चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिसमें SIP का रिकॉर्ड योगदान ₹32,297 करोड़ रहा। इस तेजी के बीच मिड-कैप फंड्स आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। हालांकि, शीर्ष तीन फंडों के प्रबंधन पर नजर डालें तो बाजार के प्रति उनकी राय में बड़ा अंतर है।
फंड मैनेजरों की अलग-अलग चालें
HDFC Mid Cap Fund ने ₹1,418 करोड़ का सबसे अधिक इनफ्लो हासिल किया। इसका AUM बढ़कर ₹1.08 लाख करोड़ हो गया है। फंड प्रबंधन ने यहां 'डिफेंसिव' रुख अपनाया है और अपने पोर्टफोलियो का 7% से अधिक हिस्सा कैश के रूप में रखा है, जो कैटेगरी औसत से दोगुना है। यह बढ़ती वैल्यूएशन के बीच सावधानी का संकेत है।
इसके विपरीत, Nippon India Growth Mid Cap Fund (₹52,271 करोड़ AUM) ने विविधीकरण (Diversification) पर दांव लगाया है। फंड ने अपने 101 स्टॉक्स वाले पोर्टफोलियो में 21% निवेश लार्ज-कैप शेयरों में रखा है ताकि स्थिरता बनी रहे।
वहीं, Invesco India Midcap Fund ने सबसे केंद्रित (Concentrated) रुख अपनाते हुए अपने पोर्टफोलियो को केवल 41 शेयरों तक सीमित रखा है। फंड का लगभग 50% निवेश टॉप 10 स्टॉक्स में है, और अगस्त में इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। इस रणनीति का नतीजा 2.40% का मंथली रिटर्न रहा।
जोखिम और बाजार का मिजाज
इनफ्लो भले ही रिकॉर्ड स्तर पर हो, लेकिन मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में वैल्यूएशन का दबाव बना हुआ है। रिकॉर्ड SIP नंबर्स रिटेल निवेशकों का भरोसा तो दिखाते हैं, लेकिन मार्केट की अस्थिरता एक बड़ा रिस्क है। फंड मैनेजरों की ये अलग-अलग रणनीतियां यह बताने के लिए काफी हैं कि बाजार की भविष्य की दिशा को लेकर राय बंटी हुई है।
