Mid-Cap Funds: बाजार की गिरावट के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम, आया **₹6,940 करोड़** का भारी निवेश

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Mid-Cap Funds: बाजार की गिरावट के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम, आया **₹6,940 करोड़** का भारी निवेश

सितंबर 2026 में बाजार में बड़ी सुस्ती के बावजूद निवेशकों ने मिड-कैप म्यूचुअल फंड्स (Mid-cap Mutual Funds) में जमकर पैसा लगाया है। Nifty Midcap 150 इंडेक्स में **7.1%** की गिरावट के बाद भी इन फंड्स में **₹6,940 करोड़** का नेट इन्फ्लो दर्ज किया गया है।

बाजार की गिरावट का फायदा?

आंकड़े बताते हैं कि म्यूचुअल फंड निवेशक बाजार की मौजूदा गिरावट को एक 'एंट्री पॉइंट' के तौर पर देख रहे हैं। मिड-कैप कंपनियां, जिन्हें SEBI ने 101 से 250 रैंक तक की कंपनियों के रूप में परिभाषित किया है, वे लार्ज-कैप की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ने की क्षमता रखती हैं। इसी उम्मीद में लंबी अवधि के लिए निवेशक इन फंड्स में निवेश कर रहे हैं।

रिस्क और वैल्युएशन का गणित

हालांकि निवेश का प्रवाह जारी है, लेकिन एक्सपर्ट्स ने ऊंचे वैल्युएशन (Elevated Valuations) को लेकर चेतावनी दी है। मिड-कैप स्टॉक्स ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। ऐसे में बाजार का सेंटीमेंट थोड़ा भी बिगड़ने पर इन स्टॉक्स में लार्ज-कैप के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।

लिक्विडिटी का चैलेंज

मिड-कैप सेगमेंट में लिक्विडिटी (Liquidity) भी एक महत्वपूर्ण चिंता है। बड़े शेयरों की तुलना में इन कंपनियों में रोजाना वॉल्यूम कम होता है। यदि बाजार में अचानक बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो फंड मैनेजर्स के लिए बिना शेयर की कीमत प्रभावित किए पोजिशन को एग्जिट करना मुश्किल हो सकता है, जिसका सीधा असर फंड की NAV पर पड़ सकता है।

अंत में, यह समझना जरूरी है कि मिड-कैप फंड्स में उतार-चढ़ाव (Volatility) अधिक होती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे केवल पिछले रिटर्न्स को न देखें, बल्कि 5 से 10 साल का लॉन्ग-टर्म होराइजन रखें और अपने रिस्क लेने की क्षमता के अनुसार ही पैसा लगाएं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.