Infrastructure Funding: म्यूचुअल फंड CEOs की बड़ी मांग, प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए बदलेंगे नियम!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Infrastructure Funding: म्यूचुअल फंड CEOs की बड़ी मांग, प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए बदलेंगे नियम!

भारत के दिग्गज म्यूचुअल फंड CEOs ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए नए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स की वकालत की है। उनका कहना है कि लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स को शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी मॉडल से फंड करना सही नहीं है, जिसके लिए क्लोज-एंडेड फंड्स जैसे विकल्प जरूरी हैं।

लिक्विडिटी मिसमैच की समस्या

Moneycontrol Mutual Fund Summit में HDFC Mutual Fund, Edelweiss Mutual Fund और Kotak Mahindra Mutual Fund के लीडर्स ने एक गंभीर चुनौती पर चर्चा की। समस्या यह है कि भारत का अधिकांश म्यूचुअल फंड उद्योग 'ओपन-एंडेड' मॉडल पर काम करता है, जहां निवेशक कभी भी पैसा निकाल सकते हैं। वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा होने में 10 साल से ज्यादा का समय लगता है। अगर मार्केट में तनाव के दौरान निवेशक अचानक पैसा निकालते हैं, तो फंड मैनेजरों के लिए इन इललिक्विड एसेट्स को बेचना मुश्किल हो जाता है, जिससे सिस्टम पर दबाव बढ़ता है।

क्या है समाधान?

इंडस्ट्री लीडर्स ने अब 'क्लोज-एंडेड' फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स का सुझाव दिया है। इसमें निवेशक का पैसा 4 से 8 साल के लिए लॉक रहता है, जिससे फंड के निवेश का समय प्रोजेक्ट की मैच्योरिटी के साथ मैच हो जाता है। इसका उदाहरण 'Bharat Bond ETF' की सफलता है, जिसने दिखाया है कि इंफ्रा डेट को कैसे बेहतर तरीके से स्ट्रक्चर किया जा सकता है।

संस्थागत निवेशकों के लिए अधिक लचीलापन

पेंशन फंड और प्रोविडेंट फंड जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए नियमों में बदलाव की भी मांग की गई है। अभी के सख्त नियम उन्हें रेटिंग घटने पर बॉन्ड बेचने के लिए मजबूर कर देते हैं, भले ही एसेट की लंबी अवधि की वैल्यू बेहतर हो। इन्हें अधिक लचीलापन मिलने से इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए पूंजी का एक स्थिर प्रवाह शुरू हो सकता है।

REITs और InvITs का महत्व

चर्चा में यह भी सामने आया कि एक बार प्रोजेक्ट पूरा होने और स्थिर कैश फ्लो शुरू होने पर, उसे REITs (Real Estate Investment Trusts) और InvITs (Infrastructure Investment Trusts) में बदला जा सकता है। इससे डेवलपर्स अपनी शुरुआती पूंजी वसूल कर नए प्रोजेक्ट्स में निवेश कर सकते हैं। अब बाजार की नजर SEBI और सरकार के अगले कदमों पर है, जो इंफ्रा फाइनेंसिंग के भविष्य को तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.