LIC MF Money Market Fund का जलवा! 3 महीने में सबसे ज्यादा रिटर्न, DSP और UTI से मुकाबला

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
LIC MF Money Market Fund का जलवा! 3 महीने में सबसे ज्यादा रिटर्न, DSP और UTI से मुकाबला

LIC MF Money Market Fund ने पिछले 3 महीनों में **1.7%** का शानदार रिटर्न दिया है। यह रिटर्न DSP Savings Fund जैसे टॉप परफॉर्मर्स के बराबर है। ऐसे में अगर आप शॉर्ट-टर्म लिक्विड ऑप्शंस की तलाश में हैं, तो यह फंड आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

Detailed Coverage

LIC MF Money Market Fund का दमदार प्रदर्शन

LIC MF Money Market Fund ने पिछले तीन महीनों में 1.7% का रिटर्न देकर अपने निवेशकों को खुश कर दिया है। ₹1,500 करोड़ से ज्यादा के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले फंड्स में यह फंड टॉप परफॉर्मेंस करने वालों में से एक है। यह रिटर्न DSP Savings Fund और Aditya Birla SL Money Manager Fund जैसे फंड्स के बराबर है। हालांकि, फंड के आकार में अंतर है, जहां Aditya Birla SL Money Manager Fund का corpus ₹27,383.4 करोड़ है, जो इस कैटेगरी के अन्य फंड्स से काफी बड़ा है।

लंबी अवधि में भी दम

निवेशक सिर्फ शॉर्ट-टर्म के रिटर्न पर ही नहीं, बल्कि फंड की कंसिस्टेंसी पर भी ध्यान देते हैं। LIC MF Money Market Fund ने पिछले एक साल में अपने बेंचमार्क रिटर्न 4.2% को 1.9% पॉइंट से पीछे छोड़ा है। तीन साल की अवधि में भी फंड ने अपने बेंचमार्क के 6.3% रिटर्न की तुलना में 0.1% पॉइंट ज्यादा का रिटर्न दिया है।

टाइमफ्रेम के हिसाब से बदलता है टॉप फंड

यह आम बात है कि अलग-अलग टाइमफ्रेम में टॉप परफॉर्म करने वाले फंड्स बदल जाते हैं। LIC MF Money Market Fund भले ही 3 महीने के विंडो में आगे हो, लेकिन लंबी अवधि में दूसरे फंड्स का प्रदर्शन बेहतर रहा है। उदाहरण के लिए, DSP Savings Fund ने 6 महीने में 3.4% का रिटर्न दिया है। वहीं, एक और तीन साल के नजरिए से UTI Money Market Fund सबसे आगे रहा है, जिसने क्रमशः 6.2% और 7.3% का रिटर्न पोस्ट किया है।

क्यों बदलता है प्रदर्शन?

मनी मार्केट फंड्स में निवेश हाई-क्वालिटी, शॉर्ट-टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में किया जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य सेविंग अकाउंट से बेहतर रिटर्न देना और हाई लिक्विडिटी बनाए रखना है। इंटरेस्ट रेट साइकल और पोर्टफोलियो में रखे डेट पेपर्स की क्वालिटी के आधार पर रिटर्न में उतार-चढ़ाव आ सकता है। इसलिए, सिर्फ शॉर्ट-टर्म रैंकिंग पर निर्भर रहने के बजाय लंबी अवधि की कंसिस्टेंसी पर ध्यान देना ज्यादा फायदेमंद होता है। निवेशकों को फंड की पोर्टफोलियो क्वालिटी, एक्सपेंस रेश्यो और एग्जिट लोड जैसे फैक्टर्स पर भी गौर करना चाहिए, क्योंकि ये नेट रिटर्न को सीधे प्रभावित करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.