Kotak Arbitrage Fund ने बड़े आर्बिट्राज फंड्स में 3 साल की अवधि में सबसे बढ़िया रिटर्न दिया है। इसने **7.1%** का CAGR दर्ज किया है। हालांकि, फंड अपने बेंचमार्क इंडेक्स से थोड़ा पीछे रहा है, जो अलग-अलग समय-सीमाओं पर रिटर्न का मूल्यांकन करने के महत्व को दर्शाता है।
Kotak Arbitrage Fund का दमदार प्रदर्शन
Magnetic Returns के अनुसार, Kotak Arbitrage Fund ने पिछले 3 साल की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) के आधार पर बड़े आर्बिट्राज फंड्स में पहला स्थान हासिल किया है। अगस्त 2026 तक, इस फंड का एसेट बेस लगभग ₹74,398 करोड़ है, जो इसे अपनी कैटेगरी में सबसे बड़े फंड्स में से एक बनाता है। इस लंबी अवधि की परफॉरमेंस के चलते इसने UTI Arbitrage Fund और SBI Arbitrage Opportunities Fund जैसे प्रतिस्पर्धी फंड्स को पीछे छोड़ दिया है।
बेंचमार्क से पिछड़ने का अंतर
अपनी मजबूत रैंकिंग के बावजूद, Kotak Arbitrage Fund अपने बेंचमार्क इंडेक्स से थोड़ा पिछड़ गया है। 3 साल की अवधि में, फंड ने NIFTY 50 Arbitrage Total Return Index से 0.6% कम रिटर्न दिया। वहीं, 1 साल की अवधि में यह अंतर 1.4% तक बढ़ गया। यह दिखाता है कि आर्बिट्राज कैटेगरी के टॉप फंड्स भी हमेशा बेंचमार्क इंडेक्स के बराबर या उससे बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।
अलग-अलग समय-सीमाओं पर प्रदर्शन
आर्बिट्राज फंड्स की परफॉरमेंस समय-सीमा के आधार पर बदलती रहती है। जहां Kotak Arbitrage Fund 3 साल की अवधि में आगे है, वहीं HDFC Arbitrage Fund जैसे फंड्स ने 1 महीने, 3 महीने और 1 साल जैसी छोटी अवधियों में बेहतर रिटर्न दिया है। इससे पता चलता है कि निवेशकों को किसी फंड की गुणवत्ता आंकने के लिए सिर्फ एक समय-सीमा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि कई मार्केट साइकिल्स में उसकी कंसिस्टेंसी देखनी चाहिए।
आर्बिट्राज फंड्स कैसे कमाते हैं?
ये फंड्स कैश और डेरिवेटिव्स मार्केट के बीच कीमत के अंतर का फायदा उठाकर मुनाफा कमाते हैं। इनकी कमाई स्प्रेड्स की उपलब्धता और मार्केट की लिक्विडिटी पर निर्भर करती है। 2026 में, आर्बिट्राज कैटेगरी हाइब्रिड सेगमेंट में अच्छा प्रदर्शन करने वालों में से रही है, जिसका मुख्य कारण मार्केट की हाई वोलैटिलिटी है, जिससे इन फंड्स को कीमत के अंतर को भुनाने के ज्यादा मौके मिले।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
निवेशकों को सिर्फ ऐतिहासिक रिटर्न के अलावा कुछ और बातों पर भी ध्यान देना चाहिए। फंड का एक्सपेंस रेशियो, जो विभिन्न प्लान्स के लिए 2.38% से 2.97% के बीच हो सकता है, सीधे निवेशक को मिलने वाले नेट रिटर्न को प्रभावित करता है। इसके अलावा, ये फंड्स मार्केट रिस्क के अधीन हैं; अगर मार्केट वोलैटिलिटी कम होती है या आर्बिट्राज के मौके घटते हैं, तो रिटर्न कम हो सकता है। टैक्सेशन भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर है, क्योंकि इन फंड्स पर आमतौर पर इक्विटी-ओरिएंटेड नियमों के तहत टैक्स लगता है, हालांकि सरकारी नीतियों में बदलाव से यह बदल सकता है।
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना है कि फंड मैनेजर विभिन्न मार्केट कंडीशंस में स्प्रेड्स को कैप्चर करने में कितना लगातार है। जैसे-जैसे मार्केट साइकिल्स बदलेंगे, फंड की लिक्विडिटी मैनेज करने की क्षमता और बेंचमार्क के साथ उसके प्रदर्शन के अंतर को कम करना, आने वाली तिमाही और सालाना समीक्षाओं में ट्रैक करने के लिए मुख्य मीट्रिक होगा।
