Kotak Arbitrage Fund ने पिछले 3 सालों में **7%** के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) के साथ अपने सेगमेंट में टॉप पोजिशन हासिल की है। यह फंड **₹72,000 करोड़** से ज्यादा की भारी-भरकम राशि मैनेज कर रहा है। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि अलग-अलग समय-सीमाओं पर इसके प्रदर्शन की तुलना इसके बेंचमार्क इंडेक्स से करना महत्वपूर्ण है।
आर्बिट्राज फंड्स में Kotak की चमक
ACE MF के 7 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, Kotak Arbitrage Fund ने आर्बिट्राज म्यूचुअल फंड कैटेगरी में अपने कई प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ दिया है। पिछले तीन सालों में इस फंड ने 7% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया है, जो इसे UTI Arbitrage Fund (जिसने 7% रिटर्न दिया) और Invesco India Arbitrage Fund (जिसने 6.9% रिटर्न दिया) जैसे बड़े फंडों से आगे रखता है।
एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में सबसे आगे
रिटर्न के मामले में अव्वल रहने के साथ-साथ, Kotak Arbitrage Fund अपनी कैटेगरी में सबसे बड़े एसेट बेस वाला फंड भी बना हुआ है। लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, यह फंड ₹72,079.2 करोड़ का कॉर्पस मैनेज कर रहा है। ₹1,500 करोड़ से ज्यादा एसेट्स वाले फंडों के बीच हुई तुलना में फंड का बड़ा साइज एक अहम फैक्टर है। यह बड़ा फंड साइज आर्बिट्राज स्ट्रेटेजी को कितनी कुशलता से मैनेज किया जाता है, इस पर असर डाल सकता है, क्योंकि आर्बिट्राज में कैश और डेरिवेटिव्स मार्केट के बीच प्राइस डिफरेंस का फायदा उठाया जाता है।
बेंचमार्क से तुलना
भले ही फंड ने अच्छा रिटर्न दिया हो, लेकिन निवेशकों के लिए अपने बेंचमार्क इंडेक्स के सापेक्ष इसके प्रदर्शन पर गौर करना जरूरी है। पिछले तीन सालों में, फंड का रिटर्न इसके बेंचमार्क से 0.6 फीसदी अंक पीछे रहा, जहां बेंचमार्क ने 7.6% का रिटर्न दिया था। यही ट्रेंड एक साल की अवधि में भी दिखा, जहां फंड बेंचमार्क से 1.2 फीसदी अंक पीछे रहा, जबकि बेंचमार्क ने 7.3% का रिटर्न दिया था। एक्टिवली मैनेज्ड फंडों में फंड और बेंचमार्क रिटर्न के बीच ऐसे अंतर सामान्य हैं, जो इंटरनल कॉस्ट्स और फंड मैनेजर की स्ट्रेटेजी के चलते हो सकते हैं।
अलग-अलग समय-सीमाओं पर रिटर्न का गणित
आर्बिट्राज कैटेगरी में लीडरशिप रैंकिंग अक्सर मापी जाने वाली अवधि के आधार पर बदलती रहती है। उदाहरण के लिए, जहां Kotak Arbitrage Fund तीन साल की अवधि में आगे है, वहीं HDFC Arbitrage Fund जैसे दूसरे फंडों ने एक महीने और तीन महीने की छोटी अवधि में बेहतर रिटर्न दिखाया है। इसी तरह, Invesco India Arbitrage Fund ने एक साल की कैटेगरी में 6.1% के रिटर्न के साथ बाजी मारी। यह अस्थिरता इस बात पर जोर देती है कि आर्बिट्राज फंड्स का मुख्य उद्देश्य आक्रामक ग्रोथ की तलाश करना नहीं, बल्कि मार्केट में प्राइस गैप का फायदा उठाकर कम जोखिम वाला एक्सपोजर प्रदान करना है। इन फंडों को ट्रैक करने वाले निवेशक इस बात पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं कि फंड कैसे लगातार इन प्राइस डिफरेंस का फायदा उठाता है, चाहे मार्केट कितना भी वोलेटाइल क्यों न हो। भविष्य में प्रदर्शन का मुख्य कारक आर्बिट्राज के अवसरों की उपलब्धता और भारतीय कैश व डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ओवरऑल लिक्विडिटी बनी रहेगी।
