Kotak Mahindra AMC के CIO हर्षा उपाध्याय का कहना है कि जहां नए निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव से डरे हुए हैं, वहीं पुराने SIP निवेशक पिछले **2 साल** के इस फ्लैट दौर को वेल्थ क्रिएशन का मौका मान रहे हैं।
पुराने निवेशक क्यों उठा रहे फायदा?
हर्षा उपाध्याय के मुताबिक, कोरोना काल के बाद आए नए निवेशकों में जहां बाजार की सुस्त चाल को लेकर हिचकिचाहट है, वहीं पुराने और मंझे हुए SIP निवेशकों का नजरिया एकदम अलग है। वे इसे 'वेल्थ क्रिएशन' (Wealth Creation) के सुनहरे मौके की तरह देख रहे हैं, जो शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के बजाय लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग माइंडसेट को दिखाता है।
कॉर्पोरेट डेट और ब्याज दरों का असर
Reserve Bank of India (RBI) ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम है। हालांकि, भारतीय कंपनियों के लिए यह बहुत बड़ी चिंता नहीं है। पिछले 1 दशक में भारतीय कंपनियों का डेट (Debt) अपने सबसे निचले स्तर पर है, जो ऊंची ब्याज दरों के बीच भी उनके प्रॉफिट मार्जिन को बचाए हुए है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर झुकाव
भारतीय प्राइमरी मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बाजार अब टेक-आधारित ग्रोथ से हटकर इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों की ओर बढ़ रहा है। आने वाले समय में 200 से ज्यादा कंपनियां आईपीओ (IPO) लाने की तैयारी में हैं, जिनका कुल मूल्य करीब ₹3.86 लाख करोड़ होने का अनुमान है। वहीं, सेकेंडरी मार्केट में प्रमोटर्स और प्राइवेट इक्विटी फर्मों द्वारा ₹4 लाख करोड़ से अधिक के शेयर बेचे जाने की उम्मीद है, जिसे घरेलू संस्थान बखूबी संभाल रहे हैं।
ग्लोबल रिस्क और सेक्टर आउटलुक
ग्लोबल मार्केट में AI सेक्टर में हो रहे भारी निवेश और उससे मिल रहे कम रिटर्न के बीच करेक्शन का खतरा बना हुआ है। हालांकि, भारतीय बाजार के लिए यह अच्छी खबर हो सकती है क्योंकि ग्लोबल फंड्स अब फंडामेंटल आधारित भारतीय बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं। फिलहाल बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और हेल्थकेयर सेक्टर पर नजर रखने की सलाह दी गई है, जबकि स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेश करते समय सावधानी बरतने की जरूरत है।
