SIP Inflows का रिकॉर्ड टूटा! जून में ₹31,781 करोड़ आया निवेश, बंद होने वाले खातों की संख्या घटी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
SIP Inflows का रिकॉर्ड टूटा! जून में ₹31,781 करोड़ आया निवेश, बंद होने वाले खातों की संख्या घटी

भारतीय निवेशकों ने जून में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए रिकॉर्ड **₹31,781 करोड़** का निवेश किया है। यह मई के **₹30,954 करोड़** से ज़्यादा है। खास बात यह है कि SIP बंद होने का अनुपात (stoppage ratio) पिछले 6 महीनों में सबसे कम रहा, जो बताता है कि नए रजिस्ट्रेशन पुराने खातों के बंद होने से कहीं ज़्यादा हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगातार 64वें महीने नेट इनफ्लो (net inflow) जारी है।

निवेश का नया कीर्तिमान

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में जून के महीने में रिटेल निवेशकों की भागीदारी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए हर महीने होने वाला निवेश बढ़कर ₹31,781 करोड़ हो गया। पिछले महीने के मुकाबले यह 2.7% की बढ़ोतरी है, जो साफ दिखाता है कि बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बावजूद लोग लंबी अवधि में पैसा बनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। पिछले साल जून के मुकाबले यह आंकड़ा 16.5% बढ़ा है, जो भारत में फाइनेंशियल सेविंग्स के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

नए SIP रजिस्ट्रेशन पर ब्रेक?

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, निवेशकों को बनाए रखने का ट्रेंड पहले से बेहतर हुआ है। SIP बंद होने का अनुपात (stoppage ratio), यानी बंद हुए SIP की तुलना में नए रजिस्ट्रेशन का अनुपात, जून में सुधरकर 77.3% रहा। यह पिछले 6 महीनों का सबसे निचला स्तर है। इस महीने में, निवेशकों ने 65.51 लाख नए SIP अकाउंट खोले, जबकि 50.64 लाख अकाउंट बंद हुए। अब कुल एक्टिव SIP खातों की संख्या बढ़कर 9.78 करोड़ हो गई है, जो एक साल पहले के 8.64 करोड़ खातों से काफी ज़्यादा है।

इक्विटी फंड्स की धूम

रिटेल निवेशकों के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड्स अभी भी पहली पसंद बने हुए हैं। जून में इन फंड्स में ₹28,973 करोड़ का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। यह इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीम्स में लगातार 64वें महीने पॉजिटिव नेट इनफ्लो का सिलसिला है। इस कैटेगरी में, मिड-कैप फंड्स की मांग सबसे ज़्यादा रही, जिनमें ₹6,090 करोड़ का नेट इनफ्लो आया। इसके बाद स्मॉल-कैप फंड्स का नंबर आता है, जिन्होंने ₹5,602 करोड़ आकर्षित किए। मिड- और स्मॉल-कैप कैटेगरी में यह रुचि दिखाती है कि निवेशक लंबी अवधि के मुनाफे के लिए ज़्यादा रिस्क लेने को तैयार हैं। हालांकि, यह देखना होगा कि अगर बाज़ार वैल्यूएशन बढ़ता है तो ये सेगमेंट्स अपनी रफ्तार बनाए रख पाते हैं या नहीं।

इंडस्ट्री एसेट ग्रोथ और डेट में आउटफ्लो

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में महीने-दर-महीने 0.79% की बढ़ोतरी हुई, जो रिकॉर्ड ₹82.22 लाख करोड़ तक पहुंच गया। जहां इक्विटी और SIP एसेट्स बढ़ रहे हैं, वहीं डेट म्यूचुअल फंड सेगमेंट में जून में ₹1.09 लाख करोड़ का नेट आउटफ्लो देखा गया। फाइनेंशियल एनालिस्ट अक्सर डेट फंड्स में ऐसे आउटफ्लो को मौसमी कारणों से जोड़ते हैं, जैसे कि कॉर्पोरेट टैक्स भुगतान और संस्थागत निवेशकों द्वारा एडवांस टैक्स रिडेम्पशन। SIP एसेट्स अब इंडस्ट्री के कुल AUM का ₹17.70 लाख करोड़, यानी 21.5% हिस्सा हैं। आने वाले महीनों में निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि क्या ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव या बाज़ार में बड़ी गिरावट की स्थिति में भी इक्विटी फंड्स में रिटेल मनी का यह स्थिर प्रवाह जारी रहता है।

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