JioBlackRock एसेट मैनेजमेंट ने **17 अगस्त, 2026** से अपने म्यूचुअल फंड स्कीम्स के लिए 'रेगुलर प्लान्स' की शुरुआत कर दी है। इस कदम से अब निवेशक डिस्ट्रीब्यूटर्स के माध्यम से भी निवेश कर पाएंगे। यह कंपनी के डिजिटल-ओनली मॉडल से एक बड़ा बदलाव है, जिसका मकसद ज्यादा निवेशकों तक पहुंच बनाना है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि रेगुलर प्लान्स में डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन के कारण डायरेक्ट प्लान्स की तुलना में थोड़ी ज्यादा लागत आती है।
अब डिस्ट्रीब्यूटर्स भी बेचेंगे JioBlackRock के फंड्स!
JioBlackRock एसेट मैनेजमेंट ने 17 अगस्त, 2026, सोमवार से अपने म्यूचुअल फंड स्कीम्स के लिए 'रेगुलर प्लान्स' लॉन्च करने का ऐलान किया है। यह कंपनी के लिए एक बड़ा स्ट्रेटेजिक बदलाव है, क्योंकि यह पहले केवल डिजिटल-ओनली और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) प्रोडक्ट्स पर फोकस करती थी। अब रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए निवेश की सुविधा देकर, कंपनी उन निवेशकों को भी टारगेट कर रही है जो खुद पोर्टफोलियो संभालने की बजाय प्रोफेशनल गाइडेंस लेना पसंद करते हैं।
रेगुलर प्लान्स: क्या हैं फायदे और नुकसान?
ये नए रेगुलर प्लान्स अब empanelled डिस्ट्रीब्यूटर्स के ज़रिए उपलब्ध होंगे। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में, ये प्लान्स 'डायरेक्ट प्लान्स' से अलग होते हैं क्योंकि इनमें डिस्ट्रीब्यूटर को उनकी सर्विस के लिए कमीशन मिलता है। यह कमीशन स्कीम के टोटल एक्सपेंस रेश्यो (TER) में जुड़ जाता है, जो कि म्यूचुअल फंड द्वारा अपने ऑपरेशनल खर्चों को कवर करने के लिए ली जाने वाली सालाना फीस है। नतीजतन, रेगुलर प्लान्स का इस्तेमाल करने वाले निवेशकों को आमतौर पर डायरेक्ट प्लान्स की तुलना में थोड़ा ज्यादा खर्च उठाना पड़ सकता है।
AUM में 18,000 करोड़ का इजाफा
Jio Financial Services और ग्लोबल इन्वेस्टमेंट दिग्गज BlackRock के इस ज्वाइंट वेंचर ने भारत में अपनी म्यूचुअल फंड की शुरुआत के बाद से एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) को लगभग ₹18,000 करोड़ तक पहुंचा दिया है (मध्य-2026 तक)। डिजिटल एक्सेस और ट्रेडिशनल डिस्ट्रीब्यूटर-आधारित बिक्री के हाइब्रिड मॉडल में शिफ्ट होना, भारत में तेजी से स्केल करने की चाह रखने वाले एसेट मैनेजर्स के लिए एक आम रणनीति है, जहां इंडिपेंडेंट डिस्ट्रीब्यूटर्स अभी भी लोगों के निवेश का एक मुख्य जरिया हैं।
कॉम्पिटिशन में कैसे आगे बढ़ेगी कंपनी?
डिस्ट्रीब्यूटर चैनल में विस्तार कंपनी के लिए नए अवसर तो लाएगा ही, साथ ही चुनौतियां भी पेश करेगा। जहां यह JioBlackRock को एक बड़े निवेशक वर्ग तक पहुंचने में मदद करेगा, वहीं यह एक हाई-कॉम्पिटिशन वाले बाजार में प्रवेश है। भारत में स्थापित एसेट मैनेजर्स के पास हजारों डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ पुराने संबंध और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क हैं। कंपनी की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन इंटरमीडियरीज को अपने प्रोडक्ट्स को स्थापित प्रतिस्पर्धियों पर तरजीह देने के लिए कितनी प्रभावी ढंग से ऑनबोर्ड और प्रोत्साहित कर पाती है।
निवेशकों के लिए, इन नए रेगुलर प्लान्स और मौजूदा डायरेक्ट ऑप्शंस के बीच प्रोडक्ट परफॉर्मेंस और लागत के अंतर पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। हालांकि डिस्ट्रीब्यूटर की सलाह और प्रशासनिक सहायता मूल्यवान हो सकती है, रेगुलर प्लान्स में थोड़ा ज्यादा एक्सपेंस रेश्यो लंबी अवधि के रिटर्न को प्रभावित कर सकता है, अगर इसे फंड मैनेजमेंट की गुणवत्ता या विशिष्ट निवेश जरूरतों से संतुलित न किया जाए। कंपनी की भविष्य की ग्रोथ इस बात से ट्रैक की जाएगी कि वह अपने शुरुआती डिजिटल फेज की एफिशिएंसी को बनाए रखते हुए इस नए चैनल के जरिए एसेट्स को कितनी अच्छी तरह बढ़ा पाती है।
