Invesco India ELSS Fund का कमाल: 3 महीने में सबसे ज़्यादा रिटर्न, पर लंबी अवधि का क्या?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Invesco India ELSS Fund का कमाल: 3 महीने में सबसे ज़्यादा रिटर्न, पर लंबी अवधि का क्या?

Invesco India ELSS Tax Saver Fund ने पिछले तीन महीनों में **6.9%** का शानदार रिटर्न देकर अपने कैटेगरी में टॉप पर जगह बनाई है। हालांकि, फंड्स की परफॉरमेंस समय के साथ बदलती रहती है, और Quant व HSBC जैसे फंड्स ने अलग-अलग अवधियों में मिला-जुला प्रदर्शन दिखाया है। ELSS फंड्स सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाने के लिए लोकप्रिय हैं और इनमें **3 साल** का लॉक-इन पीरियड होता है।

3 महीने में Invesco India ELSS Fund का जलवा

इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) कैटेगरी में Invesco India ELSS Tax Saver Fund ने पिछले तीन महीनों में 6.9% का रिटर्न देकर बाज़ी मार ली है। इसने Quant ELSS Tax Saver Fund ( 6.2% ) और HSBC ELSS Tax Saver Fund ( 4.8% ) जैसे बड़े फंड्स को पीछे छोड़ दिया। यह आंकड़े 29 जुलाई 2026 तक के हैं और इसमें ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा AUM वाले फंड्स को शामिल किया गया है।

लंबी अवधि में प्रदर्शन का बदलता नज़ारा

जहां छोटी अवधि के रिटर्न निवेशकों को आकर्षित करते हैं, वहीं लंबी अवधि में फंड्स का प्रदर्शन काफी अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, Quant ELSS Tax Saver Fund ने छह महीने और एक साल की अवधि में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है, जिसमें क्रमशः 14.5% और 12.2% का रिटर्न दर्ज किया गया है। वहीं, तीन साल की अवधि पर नज़र डालें तो HSBC ELSS Tax Saver Fund 16.3% के रिटर्न के साथ टॉप पर रहा।

यह दिखाता है कि छोटी अवधि की सफलता हमेशा लंबी अवधि की बढ़त की गारंटी नहीं देती। ELSS कैटेगरी में फंड्स की रैंकिंग फंड की रणनीति, स्टॉक सेलेक्शन और मार्केट की चाल पर निर्भर करती है।

फंड का साइज़ और बेंचमार्क परफॉरमेंस

ELSS फंड्स में Axis ELSS Tax Saver Fund सबसे बड़ा है, जिसका AUM ₹31,869.3 करोड़ है। Invesco India ELSS Tax Saver Fund ने अपने बेंचमार्क के मुकाबले भी अच्छा प्रदर्शन किया है। एक साल में इसने बेंचमार्क के -1.2% रिटर्न की तुलना में 1.0% ज़्यादा रिटर्न दिया। तीन साल की अवधि में भी फंड ने बेंचमार्क (8.5%) से 3.9% ज़्यादा रिटर्न दर्ज किया।

आम तौर पर, निवेशक इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट का फायदा उठाने के लिए ELSS फंड्स चुनते हैं। 3 साल के अनिवार्य लॉक-इन पीरियड के कारण, ये फंड्स छोटी अवधि के ट्रेडिंग के बजाय लंबी अवधि में वेल्थ बनाने के लिए हैं। ऐसे फंड्स का मूल्यांकन करते समय, निवेशकों को यह देखना चाहिए कि फंड विभिन्न मार्केट साइकल में कैसा प्रदर्शन करता है, पीयर्स की तुलना में लंबी अवधि में कितना कंसिस्टेंट रिटर्न देता है, और फंड मैनेजर का रिकॉर्ड कम से कम 3-5 साल का हो।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.