Arbitrage Mutual Fund कैटेगरी में Invesco India Arbitrage Fund ने पिछले 1 साल में **6.1%** का शानदार रिटर्न देकर बाज़ी मारी है। UTI और SBI फंड्स भी पीछे नहीं हैं। ऐसे में निवेशक इन लो-रिस्क फंड्स में पैसा लगाने पर विचार कर रहे हैं।
सबसे ज़्यादा रिटर्न किस फंड ने दिया?
Arbitrage Mutual Fund कैटेगरी में Invesco India Arbitrage Fund पिछले 1 साल के परफॉरमेंस में सबसे आगे निकल गया है। 25 जून, 2026 तक इस फंड ने 6.1% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया है। इस लिस्ट में UTI Arbitrage Fund और SBI Arbitrage Opportunities Fund भी शामिल हैं, जिन्होंने इसी अवधि में 6.0% का रिटर्न दिया है। ये वो फंड्स हैं जिनका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) कम से कम ₹1,500 करोड़ है।
अलग-अलग समय पर कौन टॉप पर?
जब बात 1 साल के रिटर्न की आती है तो Invesco India सबसे आगे है, लेकिन अलग-अलग समय-सीमा पर परफॉरमेंस लीडर्स बदल जाते हैं। उदाहरण के लिए, Kotak Arbitrage Fund के पास टॉप 5 फंड्स में सबसे बड़ा कॉर्पस है, जो ₹72,079.2 करोड़ है।
अगर लंबी अवधि की बात करें, तो Kotak Arbitrage Fund और UTI Arbitrage Fund दोनों ने पिछले 3 सालों में 7.0% CAGR का रिटर्न दिया है। वहीं, छोटे समय-सीमा की बात करें तो HDFC Arbitrage Fund ने 3 महीने में 1.5% का टॉप रिटर्न दिया है, और UTI Arbitrage Fund 1 महीने में 0.8% के साथ सबसे आगे रहा।
Arbitrage फंड्स क्यों देते हैं अलग-अलग रिटर्न?
Arbitrage फंड्स मुख्य रूप से कैश मार्केट (cash market) और डेरिवेटिव्स मार्केट (derivatives market) के बीच कीमतों के अंतर का फायदा उठाकर रिटर्न कमाते हैं। ये फंड कॉम्प्लेक्स हेजिंग स्ट्रैटेजी (hedging strategies) का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए इनका परफॉरमेंस सीधे स्टॉक की कीमतों पर निर्भर नहीं करता।
इनका रिटर्न 'स्प्रेड' (spread) पर निर्भर करता है, जो कैश मार्केट में शेयर खरीदने और फ्यूचर्स मार्केट में उसे बेचने के बीच के मूल्य का अंतर होता है। अगर मार्केट में कम उतार-चढ़ाव (volatility) या ब्याज दरों में बदलाव के कारण यह स्प्रेड कम हो जाता है, तो फंड के संभावित रिटर्न भी घट सकते हैं।
निवेश में क्या देखें और क्या हैं जोखिम?
निवेशक अक्सर आर्बिट्रेज फंड्स को सेविंग अकाउंट की तुलना में टैक्स बचाने और कम समय के लिए पैसा पार्क करने के एक अच्छे तरीके के रूप में इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इन फंड्स में कोई जोखिम नहीं है, ऐसा नहीं है।
रिटर्न को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा फैक्टर मार्केट की वोलेटिलिटी है, जो प्राइस स्प्रेड बनाने के लिए ज़रूरी है। अगर मार्केट लंबे समय तक स्थिर रहता है, तो आर्बिट्रेज के मौके कम हो जाते हैं, जिसका सीधा असर फंड के यील्ड (yield) पर पड़ता है। इन फंड्स का मूल्यांकन करते समय, निवेशकों को केवल हाल के रिटर्न पर ध्यान नहीं देना चाहिए। अलग-अलग मार्केट साइकिल्स में इनके लॉन्ग-टर्म परफॉरमेंस की तुलना करना उपयोगी होता है, ताकि यह समझा जा सके कि फंड मैनेजर टाइट आर्बिट्रेज स्प्रेड वाले समय को कैसे संभालते हैं।
